4.4 अरब साल पुराने जिरकॉन क्रिस्टल ने खोले पृथ्वी के शुरुआती इतिहास के राज, वैज्ञानिकों को मिले नए सुराग

पृथ्वी के शुरुआती इतिहास को समझना हमेशा वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती रहा है, क्योंकि उस दौर की अधिकांश चट्टानें समय के साथ नष्ट हो चुकी हैं। अब ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्रेटन और जैक हिल्स क्षेत्रों में मिले जिरकॉन (Zircon) क्रिस्टल ने अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक रहस्यों पर नई रोशनी डाली है। इन सूक्ष्म खनिजों की मदद से वैज्ञानिक पृथ्वी के शुरुआती जल चक्र, महाद्वीपों के निर्माण और आंतरिक संरचना के विकास को समझ रहे हैं।
जिरकॉन क्यों है इतना खास?
जिरकॉन एक बेहद कठोर और टिकाऊ खनिज है, जो अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रह सकता है। यही कारण है कि यह अरबों वर्षों तक अपनी मूल रासायनिक जानकारी संजोकर रखता है।
वैज्ञानिक जिरकॉन में मौजूद यूरेनियम और लेड (सीसा) के अनुपात का विश्लेषण करते हैं। समय के साथ यूरेनियम रेडियोधर्मी क्षय के जरिए लेड में बदलता रहता है। इस प्रक्रिया के आधार पर चट्टानों की आयु का अत्यंत सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। इस तकनीक को जिरकॉन क्रोनोलॉजी कहा जाता है।
4.4 अरब साल पुराने मिले क्रिस्टल
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के जैक हिल्स क्षेत्र से मिले जिरकॉन क्रिस्टल लगभग 4.4 अरब वर्ष पुराने हैं। यह पृथ्वी की अनुमानित आयु (करीब 4.54 अरब वर्ष) के बेहद करीब है। इसलिए इन्हें पृथ्वी के शुरुआती इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक साक्ष्यों में गिना जाता है।
3.1 अरब साल पुरानी चट्टानों से क्या पता चला?
वैज्ञानिकों ने पिलबारा क्षेत्र की लगभग 3.1 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों का भी अध्ययन किया। इनके रासायनिक विश्लेषण से संकेत मिले कि उस समय पृथ्वी की सतह और मेंटल के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान आज की तुलना में अलग तरीके से होता था।
शोध के अनुसार, उस दौर में पानी पृथ्वी के भीतर पहुँचने के लिए आधुनिक प्लेट टेक्टोनिक्स जैसी प्रक्रिया पर निर्भर नहीं था। इसके बजाय “ड्रिपडक्शन” (Dripduction) नामक प्रक्रिया सक्रिय थी।
क्या है ड्रिपडक्शन?
ड्रिपडक्शन एक ऐसी भूवैज्ञानिक प्रक्रिया मानी जाती है जिसमें भारी और पानी से भरपूर पृथ्वी की बाहरी परत (क्रस्ट) धीरे-धीरे नीचे मेंटल की ओर धँस जाती है। वहाँ यह पिघलती है और बाद में ज्वालामुखीय गतिविधियों के जरिए पानी तथा अन्य तत्व दोबारा सतह तक पहुँचते हैं। इससे संकेत मिलता है कि पृथ्वी पर जल चक्र बहुत प्राचीन काल से किसी न किसी रूप में सक्रिय था।
इस खोज का महत्व
यह अध्ययन बताता है कि पृथ्वी के शुरुआती अरबों वर्षों में भी जल का पुनर्चक्रण हो रहा था और आंतरिक भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ आज की तुलना में अलग तरीके से काम करती थीं। जिरकॉन जैसे खनिज वैज्ञानिकों के लिए प्राकृतिक “समय कैप्सूल” हैं, जिनकी मदद से पृथ्वी के निर्माण, प्रारंभिक महाद्वीपों के विकास और जीवन के अनुकूल परिस्थितियों के बनने की कहानी को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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