Supreme Court की चेतावनी, नक्शे से  गायब हो जायेगा हिमाचल, मुख्य सचिव ने आज बुलाई बैठक

शिमला. सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पारिस्थितिक असंतुलन की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति में बदलाव नहीं आया तो पूरा प्रदेश विलुप्त हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि जलवायु परिवर्तन का राज्य पर स्पष्ट और चिंताजनक प्रभाव पड़ रहा है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की प्राकृतिक आपदाओं को लेकर जताई गई चिंता के बाद हिमाचल का सरकारी तंत्र भी हिला है, जिसको लेकर मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज इस मामले पर 14 विभागों की बैठक बुलाई है.

इस बैठक में उद्योग, राजस्व, शहरी विकास, टीसीपी, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि, बागवानी, लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग, डिजास्टर मैनेजमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट बोर्ड, एनवायरनमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य, सचिव बैठक में शामिल होंगे. वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को अगली सुनवाई रखी है. सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले सरकार को अपना जवाब दायर करना है. ऐसे में इन सभी संबंधित विभागों से प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने पर सुझाव लिए जाएंगे, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दायर किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने प्रिसटीन होटल एंड रिजॉट्र्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम हिमाचल सरकार मामले में चेतावनी भरा फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल में घट रही प्राकृतिक आपदाओं पर प्रदेश के भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए चेतावनी दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका में कन्वर्ट कर दिया है. जस्टिस जीवी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा था कि हम राज्य सरकार और भारत संघ पर यह प्रभाव डालना चाहते हैं कि राजस्व अर्जित करना ही सब कुछ नहीं है. पर्यावरण और पारिस्थितिकी की कीमत पर राजस्व अर्जित नहीं किया जा सकता. अगर यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब पूरा हिमाचल प्रदेश देश के नक्शे से गायब हो जाएगा. भगवान न करे ऐसा हो.

25 अगस्त को होगी मामले की अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि प्राकृतिक आपदाओं के लिए इंसान जिम्मेदार है, क्योंकि पर्यावरण और परिस्थितिकी की कीमत पर राजस्व अर्जित नहीं किया जा सकता. इससे पहले भू वैज्ञानिकों, पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय लोगों की राय लेना महत्त्वपूर्ण है. इस तरह के मामलों में निगरानी रखना केंद्र सरकार का दायित्व है. शीर्ष अदालत ने इस मामले में रजिस्ट्री को जनहित में एक रिट याचिका दर्ज करने का निर्देश भी दिया है. मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में प्राकृतिक आपदा की बढ़ती घटनाओं पर क्या जवाब देना है, ये आज 14 विभागों से साथ होने वाली बैठक में तय होगा.

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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