Supreme Court ने कहा- एमपी सरकार सो रही है क्या? OBC के 13% होल्ड पदों पर 6 साल में क्या किया, अंतिम सुनवाई 23 सितंबर को

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सरकारी भर्तियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 13% पद होल्ड होने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को फटकार लगाई है।ओबीसी महासभा के वकील वरुण ठाकुर ने बताया- कोर्ट ने कहा- एमपी सरकार सो रही है क्या? OBC के 13% होल्ड पदों पर 6 साल में क्या किया?

एडवोकेट ठाकुर ने बताया- याचिका MPPSC के चयनित अभ्यर्थियों ने लगाई है, जिनको नियुक्ति नहीं दी जा रही है। मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने 29 सितंबर 2022 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था, इसे कोर्ट में चैलेंज किया गया है। सरकार ने कोर्ट में कहा था कि हम भी रिजर्वेशन देना चाहते हैं। ऐसे में ऑर्डनेंस पर जो स्टे है, उसे वेकेंट किया जाए।

इस पर कोर्ट ने कहा- सबसे बड़ी बात ये है कि मप्र सरकार के जो जनप्रतिनिधि कहते हैं कि हम ओबीसी को 27% आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, उनके वकील सुनवाई में तब पहुंचते हैं, जब ऑर्डर डिक्टेट हो जाता है। फिर ये नेता कहते हैं कि ऑर्डनेंस पर स्टे वेकेंट नहीं होने से प्रशासनिक परेशानियां आ रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के चयनित अभ्यर्थियों की तरफ से कोर्ट के सामने पक्ष रखा।कोर्ट ने इस मामले को अति महत्वपूर्ण मानते हुए टॉप ऑफ द बोर्ड में लिस्टेड किया है। 23 सितंबर को इसे पहले नंबर पर सुनवाई के लिए रखा है। ये 13% होल्ड वाले मामले में सभी याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट ने आरक्षण सीमा 14% तक सीमित की थी
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 4 मई 2022 के अंतरिम आदेश में ओबीसी आरक्षण की सीमा 14% तक सीमित कर दी थी। इसके बाद से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

5 अगस्त को हुई सुनवाई में ओबीसी महासभा की ओर से कहा गया था कि परीक्षा के बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन नियुक्ति नहीं दी जा रही है। छत्तीसगढ़ जैसी राहत एमपी में दी जाए।
दूसरी तरफ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चांडुरकर की खंडपीठ के सामने अनारक्षित वर्ग द्वारा 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिए जाने पर बात रखी गई थी।

सरकार के आदेश पर स्टे हटाने की मांग
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में 2019 में ओबीसी को 27% आरक्षण देने का बिल पारित हुआ था। उसके बाद जब 27% ओबीसी आरक्षण के क्रियान्वयन आदेश जारी हुए तो 4 मई 2022 में अभ्यर्थी शिवम गौतम ने मप्र हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।

हाईकोर्ट ने ओबीसी को 27% आरक्षण के क्रियान्वयन आदेश पर स्टे दे दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार के संशोधित कानून और नियम पर रोक लगा दी गई थी। इन संशोधनों से आरक्षण की कुल सीमा 73% तक पहुंच रही थी। एसटी को 20%, एससी को 16%, ओबीसी को 27% और आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य (ईडब्ल्यूएस) को 10% आरक्षण शामिल था।
बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो गया। सरकार ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए ट्रांसफर केस 7/2025 के तहत स्टे वैकेंट की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है। अब अगर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है तो मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27% हो सकता है। अभी तक 70 से ज्यादा याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो चुकी हैं।

Exit mobile version