Sanjay Pathak : फोन कर जज से संपर्क की कोशिश पर घिरे भाजपा विधायक, हाईकोर्ट की टिप्पणी- आपके क्लाइंट के कृत्य को जज ने खुद उजागर किया

जबलपुर। सिहोरा तहसील में 443 करोड़ रुपए के कथित अवैध खनन मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट के जज पर दबाव बनाने के आरोपों को लेकर भाजपा विधायक संजय पाठक को गुरुवार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। इस मामले में दायर याचिका ने स्वयं उजागर किया है। पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाठक की ओर से रखी गई प्रारंभिक आपत्ति पर सख्त टिप्पणी कर कहा, आपके क्लाइंट के कृत्य को हाईकोर्ट के जज
मामले में याचिकाकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि संजय पाठक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए दलील दी कि यह याचिका मेंटेनेबल (चलायमान) नहीं है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर आगे सुनवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब 2 अप्रेल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाठक की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता को अगली तारीख पर एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) के रूप में उपस्थित होने की सलाह भी दी।
स्वीकृति से अधिक खनन के आरोप
दरअसल, पाठक की घरेलू फर्मों आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पैसिफिक एक्सपोर्ट पर स्वीकृत मात्रा से अधिक खनन का आरोप है। 31 जनवरी 2025 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत की गई थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने लिखित आदेश में उल्लेख किया था कि पाठक ने एक विशेष मामले पर चर्चा के लिए उनसे कई बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। बाद उन्होंने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था।
कटनी निवासी ने दायर की है याचिका
वहीं, कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट के जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। पाठक परिवार से जुड़ी खदानों के मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में निर्धारित थी। इसी दौरान 1 सितंबर 2025 को जस्टिस मिश्रा ने स्वयं इस बात का खुलासा किया था कि विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी।





