MP : इंदौर में मुख्यमंत्री के खजराना मंदिर दर्शन के दौरान हुई भारी धक्का-मुक्की पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं में झड़प

इंदौर। यहाँ बुधवार को सीएम से पहुंचने के पहले खजराना में विधानसभा 5 के बीजेपी कार्यकर्ता और पुलिस प्रशासन में झड़प हो गई। साथ ही प्रणव मंडल के पार्षद और 5 नंबर के कार्यकर्ता और विधायक महेंद्र हार्डिया के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। बीजेपी सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह पर आयोजित सभा में लगे मंच पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस प्रशासन और नेताओं के बीच झड़प भी हुई। मंच पर कम कुर्सियों के कारण बीजेपी पार्षद और विधायक के बीच भी कहासुनी हुई, जिसके बाद पार्षद कार्यक्रम छोड़कर रवाना हो गए।
मंच के ऊपर सीमित नेताओं की ही कुर्सी लगी थी और बाकायदा उनके नाम लिखे थे। सभी विधायक मंत्री और पूर्व नगर अध्यक्ष के नाम थे। तभी विधानसभा 5 के पार्षद प्रणव मंडल और मुद्रा शास्त्री जाकर कुर्सी पर बैठ गए। प्रणव मंडल और मुद्रा शास्त्री का नाम ऊपर मंच की लिस्ट में नहीं था। तभी किसी पुलिस अधिकारी ने शास्त्री और मंडल से कहा की आपका मंच पर बैठने वाली लिस्ट में नाम नहीं हैं।
गुस्से में मुद्रा शास्त्री मंच से नीचे उतरे और विधायक महेंद्र हार्डिया के पास जाकर बोले कि हमारा नाम लिस्ट में क्यों नहीं है हम पार्षद हैं। तब विधायक महेंद्र ने उनसे कहा कि एक काम करो तुम मेरी कुर्सी पर बैठ जाओ। मैं नीचे खड़ा रहता हूं यह सुनकर मुद्रा शास्त्री और प्रणव मंडल गुस्से में वहां से हट गए। यह देख पार्षद संध्या यादव और मुद्रा शास्त्री तुरंत वह से अपनी कर में वापस चले गए।

घटनाक्रम को देखते हुए मंच के पास भाजपा नेता और कार्यकर्ता इकट्ठे हो गए। जिसमें पूर्व पार्षद परशराम वर्मा, पार्षद पति अनिल गोहार, नंदू बोरासी, भोला यादव, मंडल अध्यक्ष दीपेश राजोरिया, उमेश मंगरोला और नितेश जैन मौजूद थे। तभी एडिशनल एसपी अमरेंद्र सिंह चौहान, टीआई तारेश सोनी और खजराना टीआई मनोज सेंधव दलबल के साथ पहुंचे व नेताओं को कार्यकर्ताओं को वहां से जाने को कहा तभी पार्षद पति अनिल गोहर, परशुराम वर्मा टीआई तारे सोनी से उलझ गए और जमकर बहस करने लगे। तब यह देख महेंद्र हार्डिया मंच से नीचे उतरे और सभी नेताओं को बाहर जाने का कहने लगे।
तब कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमारे विधानसभा का कार्यक्रम है और हम यहां नहीं खड़े रह सकते हैं, तो मतलब क्या है। यह सुनकर हार्डिया ने कहा कि मैं ही बाहर चले जाता हूं।





