मोदी तत्व: हर युग और काल का अद्भुत संगम!!!
मुसद्दी की चौपाल  !

अरुण दीक्षित
वैसे तो आजकल सब दिन एक जैसे ही कट रहे हैं..न सावन सूखा ..न भादों हरा! लेकिन फिर भी इतवार का दिन कुछ अलग भाव लिए आता है।देर तक सोना और नींद में आजादी का भाव इतवार की प्रमुख आदत में शामिल  है।आज भी इसी भाव में बिस्तर पर पड़े थे!अचानक फोन घनघनाने लगा!
पहले तो लगा कि अविनाशी की सरकार कोई अलार्म बजा रही है।शायद यह बताना चाहती है कि कल 4 मई है।तैयार हो जाओ लुटने के लिए!पांच राज्यों के चुनाव के भारी भरकम खर्च की वसूली तुम सब से ही की जानी है।लेकिन जब फोन ने चिल्लाना बंद नहीं किया तो बिना चश्मे के,नई आंखों से,उसके स्क्रीन पर नजर घुमाई।स्क्रीन पर नजर पड़ते ही नींद और आलस ठीक वैसे ही गायब हो गए जैसे आजकल बाजार से रसोई गैस गायब है।पता चला कि उखरा से हमारे मुसद्दी भइया याद कर रहे हैं।हड़बड़ा कर फोन उठाया!साथ ही मन में न जाने कितने सवाल तैर गए।बहुत दिन से भइया को फोन नहीं किया था।इसलिए गंजी खोपड़ी पर पादुका पूजन तो तय ही था! और भी न जाने क्या क्या सुनना होगा!
  वैसे हमारे मुसद्दी भइया हैं बहुत अच्छे! वे न तो “सिर्फ अपने मन की बात” करते हैं और न ही रात आठ बजे होने वाली आकाशवाणी की तरह कोई झटका देते हैं।वे हमेशा अपनी चौपाल पर उठने वाली देशव्यापी और विश्वव्यापी समस्याओं पर ही बात करते हैं। खैर मैंने फोन उठाते ही पालागन दाग दिया!मुसद्दी भइया ने हंसते हुए ,हमेशा की तरह ,झंडा बुलंद रहने और जूता पुजते रहने का आशीर्वाद दिया। साथ ही पूछा – क्यों छोटे अभी तक सो रहे हो!लगता है कि कमरे की खिड़की बंद है जो तुम्हें सूरज चढ़ने का अहसास नहीं हुआ?ठंडी मशीन(एसी) में मजे ले रहे हो? लगता है “मोदी तत्व” का असर सर चढ़  गया है?
भइया की बात सुनकर मैं चौंका!नींद उड़ गई।सीधा होकर बैठ गया!फिर मैंने भइया से पूछा – आप क्या कह रहे हैं भइया? मेरी समझ में नहीं आया!ये मोदी तत्व क्या है? भइया जोर से हंसे फिर बोले लगता है आजकल ज्यादा आराम हो रहा है।देश में देशभक्ति के समाजशास्त्र के नाम पर मोदी जी के कारनामों को पढ़ाए जाने की तैयारी हो गई है।चारों ओर गदर मचा हुआ है।हमारी चौपाल पर तो कल से पंडित कुलशिरोमणि शुक्ल और मनोरंजन चौबे तलवारें खींचे बैठे हैं!पूरा गांव परेशान हो रहा है इनके झगड़े में!ऐसा लग रहा है कि दोनों आपस में दो दो हाथ करके ही मानेंगे!शुक्ल जी का तर्क है अब मोदी तत्व पढ़ाने
का कोई औचित्य ही नहीं है।पूरा देश मोदी तत्व की गिरफ्त में है। जैसे मोदी जी ने भीख मांग कर, जंगलों की खाक छानते हुए इंटायर पॉलिटिकल साइंस की डिग्री हासिल कर ली है वैसे ही इस देश के बाल, वृद्ध और युवा पिछले 12 साल में मोदी तत्व को आत्मसात कर चुके हैं।अब उन्हें पढ़ाने की क्या जरूरत?अंधभक्त की उपाधि पा चुके इन लोगों को “इंटायर मोदी तत्व विशेषज्ञ” की उपाधि घर बैठे दी जानी चाहिए!
उधर चौबे अपना रमतूला अलग बजा रहे हैं। तुम इन दोनों से ही बात करो!फिर कुछ समाधान निकालना! तुम्हारे मित्रगण तो बहुत ज्ञानी मानी हैं।तत्काल हर समस्या का समाधान बता देते हैं।लो बात करो…यह कहते हुए भइया ने फोन शुक्ल जी को पकड़ा दिया! मैंने उन्हें प्रणाम किया.. लेकिन वे उसे अनसुना करके सीधे अपनी बात पर आ गए!
शुक्ल जी बोले – देखो भाई मेरी दृष्टि में तो अब देश का हर नागरिक मोदी तत्व से अच्छी तरह परिचित हो गया है।खुद मोदी ने 12 साल में घर बैठे बैठे मन की बात कर कर के मोदी तत्व को पूरे देश में अमरबेल की तरह फैला दिया है।लोग उनके मकड़जाल में फंसे हुए हैं।हरे भरे पेड़ों की तरह सूखते जा रहे हैं।चारों लोक और दसों दिशाओं में मोदी तत्व ही छाया हुआ है।अब इसे पढ़ाने की क्या जरूरत?तुम इस चौबे से पूछो जरा… यह कहते हुए शुक्ल जी की वाणी विराम पर चली गई और चौबे जी का पहला अध्याय शुरू हो गया!
चौबे जी ने कहा कि देखो भइया शुक्ल जी पर उम्र का असर हो गया है। इसलिए अब उन्हें तत्व ज्ञान का महत्व नहीं समझ आ रहा है!अब तुम्हीं बताओ कि बिना पढ़ाए मोदी तत्व लोगों की समझ में कैसे आएगा?मोदी जी अविनाशी हैं!वे सतयुग में भी रहे हैं और द्वापर व त्रेता में भी!कलयुग में तो उन्हें खेलने का मौका मिला है।अब जब तक उनके बारे में विस्तार से बताया नहीं जाएगा तब तक देश और दुनिया के लोग उनके बारे में जानेंगे कैसे ?
मोदी तत्व की सटीक व्याख्या के लिए उन लोगों के बारे में बताया जाना जरूरी है जिन लोगों से मोदी ने प्रेरणा ली है या जिनके गुणों को आत्मसात किया है।वैसे तो मोदी तत्व इतना व्यापक है कि खुद व्यास  जी न बोल पाएंगे और न गणेश जी लिख पाएंगे!अब मोदी जी राम जी को लाए हैं तो उस काल का जिक्र भी जरूरी है!मोदी तत्व की बात हो तो कैकेई और मंथरा के साथ साथ सीता को घर से निकलवाने वाले धोबी के तत्व भी देखने होंगे।
कृष्ण का जिक्र करें तो सबसे पहले पिता की सत्ता छीनने वाले उनके मामा कंस के तत्व देखने होंगे! फिर महाभारत के मुख्य सूत्रधार दुर्योधन के मामा शकुनि , भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या तक पहुंचाने वाले शिखंडी तथा पुत्र मोह में कुल नाश कराने वाले धृतराष्ट्र और आंखे होते हुए भी आंखों पर पट्टी बांध लेने वाली गांधारी के तत्व भी विचारणीय होंगे।क्योंकि इन सभी तत्वों का प्रदर्शन मोदी जी करते रहे हैं।आप जरा गौर करेंगे तो आपको असली मोदी तत्व समझ में आएगा।
   पिछले ढाई दशक में सेवा के जितने तत्व  मोदी जी ने प्रदर्शित किए हैं उनकी असली व्याख्या संत शिरोमणि परमपूज्य संत आसाराम बापू,रामरहीम,चिन्मयानंद से लेकर खराट जैसे अनगिनत धर्माचार्य बखूबी कर पाएंगे! जिस नारी सम्मान को लेकर आज मोदी  गांव गांव ,गली गली घूम रहे हैं, उसके तत्व को समझाने के लिए बृजभूषण शरण सिंह,सम्राट चौधरी, कर्नाटक वाले रेवन्ना के साथ साथ हिमांता बिसबा सरमा जैसे अनगिनत मोदी प्रेमियों के तत्व को भी समझना होगा।
सुब्रह्मण्यम स्वामी और मधु किश्वर द्वारा उठाए जा रहे तत्वों को भी करीब से बताया जाना होगा!
ऐसे लोगों को “मोदी तत्व” विशेषज्ञ के तौर पर शामिल करना होगा।
  चौबे जी अपनी रौ में बहे जा रहे थे…मोदी तत्व के साथ “मानस” पर भी जोर डालना पड़ेगा!पुलवामा से पहलगाम की बात न भी हो पर ताजे ताजे “दोलांड तत्व” को तो देखना ही होगा!और भी न जाने कितने तत्व मोदी तत्व में शामिल हैं ।इन्हें यदि देशभक्ति के समाजशास्त्र  में शामिल नहीं किया गया तो मोदी तत्व अधूरा ही रह जाएगा।आखिर मोदी को नेहरू से आगे जाना है।ऐसे में देश का जो सामाजिक विभाजन उन्होंने किया है,उसे भौतिक रूप भी दिया जाना है।
और भी न जाने क्या क्या!कहां तक बताऊं?मेरा मानना है कि मोदी तत्व को पढ़ाया जाना अति आवश्यक है।इस तत्व ने चारों युगों की यात्रा की है।अब तुम्हीं बताओ कि रील बनाने के खेल में उलझी देश की युवा पीढ़ी के लिए “मोदी तत्व” का ज्ञान जरूरी है कि नहीं?
  यह कहते हुए चौबे जी ने लंबी सांस ली.. मैंने तत्काल उनकी पतंग की डोर थाम ली। मैंने उनसे कहा कि भाई साहब आप सही कह रहे हैं।मोदी तत्व की विस्तृत व्याख्या के बिना उसका ज्ञान अधूरा रह जाएगा।इसे तो नालंदा और तक्षशिला की तर्ज पर एक मोदी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय खोल कर पढ़ाया जाना चाहिए।इस तत्व ज्ञान को भारत तक सीमित न रख कर पूरे ब्रह्मांड में फैलाया जाना चाहिए।
इतना कह कर मैंने चौबे जी के श्रीचरणों में प्रणाम कर अपने फोन को उनके चंगुल से छुड़ा लिया ।
अब आप ही बताइए कि युगों युगों तक फैले इस मोदी तत्व का प्रसार पूरे ब्रह्मांड में होना चाहिए कि नहीं?

साभार.

3 मई 2026
भोपाल मध्यप्रदेश
9425006206

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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