ED Raid : आबकारी घोटाले और फर्जी चालान मामले में मप्र में 18 ठिकानों पर ईडी के छापे, आबकारी उपायुक्त खरे के

भोपाल/इंदौर/सतना। एजेंसी। मध्यप्रदेश में शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर, भोपाल, सतना, मंदसौर और जबलपुर जिले सहित कई शहरों में 18 ठिकानों पर  आबकारी अधिकारियों और शराब ठेकेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। यह कार्रवाई 71 करोड़ रुपये के फर्जी बैंक चालान घोटाले के सिलसिले में की जा रही है।
इंदौर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को एक साथ 18 ठिकानों पर छापे मारे हैं। इनमें ज्यादातर शराब कारोबारी हैं। अल सुबह पहुंची ईडी की टीमों ने सर्चिंग शुरू कर दी है। ईडी के सूत्रों के मुताबिक बसंत बिहार कॉलोनी, तुलसी नगर और महालक्ष्मी नगर में कार्यवाही की है। फर्जी चालान और आबकारी घोटाले को लेकर यह कार्यवाही की जा रही है। यह मामला साल 2018 में सामने आया था। आरोप है कि घोटाले को आबकारी अफसरों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया था। घोटाले का आंकड़ा 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने के आसार हैं।
जिला आबकारी कार्यालय इंदौर सहित अन्य जिला आबकारी कार्यालयों में सामने आए इस 42 करोड़ के घोटाले को लेकर 12 अगस्त 2017 को रावजी बाजार पुलिस ने ठेकेदारों सहित 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया था। इनमें  शराब ठेकेदार एमजी रोड समूह के अविनाश और विजय श्रीवास्तव, जीपीओ चौराहा समूह के राकेश जायसवाल, तोप खाना समूह योगेंद्र जायसवाल, बायपास चौराहा देवगुराडिय़ा समूह राहुल चौकसे, गवली पलासिया समूह सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, लवकुश और प्रदीप जायसवाल शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच एक एफआईआर के आधार पर शुरू की है, जिसमें आरोप है कि कुछ शराब ठेकेदारों ने फर्जी चालान और दस्तावेजों के जरिए सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान पहुंचाया। सूत्रों के अनुसार, वित्त वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच इन ठेकेदारों ने नकली चालान के माध्यम से शराब खरीदने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हासिल किए।
जांच में यह सामने आया है कि आरोपी शराब ठेकेदार चालानों में जान बूझकर हेरफेर करते थे। चालान में राशि अंकों में भरी जाती थी। लेकिन शब्दों में राशि के लिए छोड़ी गई जगह को खाली रखा जाता था। बैंक में मूल राशि जमा करने के बाद, ठेकेदार बाद में चालान की कॉपी में उस खाली जगह पर लाखों रुपये जोड़ देते थे।

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भोपाल में आबकारी उपायुक्त के घर ईडी का छापा

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आबकारी विभाग के उपायुक्त आलोक खरे भोपाल और रीवा के ठिकानों पर आज सुबह छापेमारी की है। भोपाल में खरे के साथ आबकारी विभाग के एक और अधिकारी के यहां भी सर्चिंग की सूचना है। यह कार्रवाई आबकारी विभाग के फर्जी एफडी मामले से भी जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस मामले में ईडी की ओर से अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
ईडी ने यह कार्रवाई लोकायुक्त छापे के आधार पर शुरू की है। लोकायुक्त पुलिस ने छह साल पहले आलोक खरे के सात ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें भोपाल में दो, इंदौर में दो, रायसेन में दो और छतरपुर में एक जगह शामिल थी। लोकायुक्त जांच में करीब 100 करोड़ से अधिक की संपति का खुलासा हुआ था। लोकायुक्त की जांच में इंदौर के पॉश इलाके में एक पैंट हाउस और एक बंगला पता चला था। भोपाल के चूनाभट्टी और बाग मुंगालिया में दो बड़े बंगले और कोलार में फार्म हाउस की जमीन है।
निलंबित अधिकारी हो चुके हैं बहाल
घोटाला उजागर होने पर विभाग ने तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे, सहायक आबकारी अधिकारी डीएस सिसोदिया, एसएन पाठक, उप निरीक्षक कौशल्या सबनानी, क्लर्क धनराजसिंह व अनमोल गुप्ते को सस्पेंड किया था। ये सभी बहाल हो चुके है।


ED के पूर्व जांच अधिकारियों को हटाकर दूसरे अफसरों को डी जांच


इंदौर में किए गए 71 करोड़ के फर्जी बैंक चालान आबकारी घोटाले में ED के पूर्व जांच अधिकारियों की भी शिकायत हो गई थी। PMO से उन ED अफसरों को हटा कर उच्च स्तरीय अधिकारियों को जांच सौंपी गई थी। उसके बाद वरिष्ठतम अधिकारी की निगरानी में पूरी जांच और रेड की कार्यवाही चल रही है। MP से जुड़े ED अफसरों को इस रेड से दूर रखा गया है, दिल्ली और लखनऊ के ED अफसरों ने रेड की है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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