Market : जिसका डर था वही हुआ… ब्रोकरेज ने घटा दिए Nifty के टारगेट, अब नहीं लौट पाएगी बाजार की रफ्तार?

मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब ग्लोबल मार्केट्स के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के आउटलुक पर भी दिखने लगा है. कई बड़े ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने भारत के इक्विटी मार्केट को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किया है और Nifty के टारगेट कम कर दिए हैं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए ब्रोकरेज अब थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं.
हालांकि इसके बावजूद कई सेक्टर ऐसे हैं जिनमें ब्रोकरेज अब भी मजबूती देख रहे हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि प्रमुख ब्रोकरेज हाउस का भारत को लेकर क्या नजरिया है और इसका निवेशकों पर क्या असर हो सकता है.
Citi और Nomura ने घटाए Nifty के लक्ष्य
ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura और Citi ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारतीय बाजार के टारगेट कम कर दिए हैं. Nomura ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty का टारगेट 29,300 से घटाकर 24,900 कर दिया है. यानी ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार की तेजी सीमित रह सकती है.
वहीं Citi ने भी अपने अनुमान में कटौती करते हुए Nifty का लक्ष्य 28,500 से घटाकर 27,000 कर दिया है. इससे साफ है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण ब्रोकरेज हाउस भारतीय बाजार के आउटलुक को थोड़ा सावधानी के साथ देख रहे हैं.
Morgan Stanley ने भी भारत को किया डाउनग्रेड
इससे पहले ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक Morgan Stanley ने भी भारत को लेकर अपनी रेटिंग में बदलाव किया थाNomura के मुताबिक अगर हालात और बिगड़ते हैं तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज ने अपने बेयर केस में Nifty का लक्ष्य 21,000 तक बताया है.
ब्रोकरेज का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से FY27 की कॉरपोरेट कमाई पर 10–15% तक का जोखिम पैदा हो सकता है. इसके अलावा निकट अवधि में बाजार में करीब 5% और करेक्शन की संभावना जताई गई है. Nomura का मानना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द खत्म होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।
तेल की कीमतें क्यों हैं सबसे बड़ा जोखिम
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है. देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा LPG, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है.
Nomura के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल तक रहती है, तो इसका असर सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) संभाल सकती हैं.लेकिन अगर तेल की कीमत इससे ज्यादा बढ़ती है, तो इसका बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने और मांग घटने का खतरा पैदा हो सकता है.
घरेलू फंड्स की खरीदारी भी धीमी
हाल के समय में बाजार को सहारा देने में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की बड़ी भूमिका रही है. हालांकि ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू फंड्स की खरीदारी की रफ्तार भी अब थोड़ी धीमी पड़ती दिख रही है, जिससे बाजार की मजबूती पर असर पड़ सकता है.
Citi का सेक्टर आउटलुक
Citi ने अपने सेक्टर आउटलुक में भी बदलाव किया है.
ब्रोकरेज ने ऑटो सेक्टर को Overweight से घटाकर Neutral कर दिया है. इसकी वजह कच्चे तेल और गैस पर निर्भरता को बताया गया है, क्योंकि तेल महंगा होने से लागत बढ़ सकती है और मांग पर असर पड़ सकता है.
Citi के पसंदीदा सेक्टर:
बैंकिंग
हेल्थकेयर
टेलीकॉम
डिफेंस
कम पसंदीदा सेक्टर:
IT सर्विसेज
मेटल
कंज्यूमर स्टेपल्स





