अमेरिकी अदालत में अडानी केस संदेह के घेरे में, DOJ के दावे पर उठे सवाल, भारतीय आदेशों में रिश्वत की जांच का जिक्र ही नहीं

नई दिल्ली: अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने उद्योगपति गौतम अडानी और अन्य के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने के अपने फैसले का बचाव करते हुए दावा किया है कि भारत में इस मामले से जुड़े कई आरोपों की पहले ही जांच हो चुकी है और किसी तरह की “कार्रवाई योग्य अनियमितता” नहीं मिली। हालांकि, न्याय विभाग द्वारा अदालत में प्रस्तुत भारतीय सरकारी आदेशों से यह स्पष्ट नहीं होता कि कथित रिश्वतखोरी की साजिश की जांच वास्तव में हुई थी।
न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दायर जवाब में DOJ के प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैककॉट्टर ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने राजनीतिक कारणों से अडानी के खिलाफ मामला दर्ज किया था और इसका उद्देश्य केवल उनकी सार्वजनिक बदनामी करना था।
DOJ ने अदालत को बताया कि भारत ने 2026 में जारी कई रिपोर्टों और आदेशों में संबंधित आरोपों की समीक्षा कर “कोई कार्रवाई योग्य अनियमितता नहीं” पाई। लेकिन अदालत में संलग्न तीन भारतीय आदेशों की समीक्षा से यह संकेत मिलता है कि इनमें अमेरिकी अभियोग के मुख्य आधार—कथित रिश्वतखोरी की साजिश—की जांच नहीं की गई थी।
अदालत ने मांगा था विस्तृत स्पष्टीकरण
यह जवाब अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के 26 जून के आदेश के बाद दाखिल किया गया। न्यायाधीश ने DOJ की पहले की याचिका को “अत्यंत संक्षिप्त और निष्कर्षात्मक” बताते हुए अभियोग वापस लेने के सभी कारणों और उनके तथ्यात्मक आधार को विस्तार से बताने का निर्देश दिया था।
DOJ का संवैधानिक अधिकार वाला तर्क
मैककॉट्टर ने अपने जवाब में कहा कि आपराधिक मुकदमा शुरू करना या वापस लेना अमेरिकी कार्यपालिका का संवैधानिक अधिकार है और अदालत को इस निर्णय के कारण पूछने का सीमित अधिकार है। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देश के बाद ही विभाग ने अपने निर्णय के पीछे के कारणों का विस्तृत विवरण दिया।
अभियोजकों के हस्ताक्षर नहीं
इस जवाब पर केवल आर. ट्रेंट मैककॉट्टर के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कहा कि अभियोग वापस लेने का निर्णय पूरी तरह उनका था, इसलिए मामले को संभाल रहे अभियोजकों या अमेरिकी अटॉर्नी से हस्ताक्षर नहीं कराए गए।
इससे पहले भी मई में दाखिल याचिका पर केवल मैककॉट्टर के हस्ताक्षर थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले से जुड़े कुछ अभियोजकों ने इस फैसले से असहमति जताते हुए बाद में खुद को मामले से अलग करने की अर्जी दी थी।
ट्रंप के करीबी वकील का नाम भी चर्चा में
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकार और वकील बोरिस एप्सटीन की भूमिका को लेकर भी विभाग के भीतर चर्चा हुई थी। हालांकि एप्सटीन, अमेरिकी न्याय विभाग और अडानी समूह—तीनों ने इस मामले में उनकी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
नोट: अमेरिकी न्याय विभाग ने मुकदमा वापस लेने के समर्थन में अपने तर्क अदालत के सामने रखे हैं। दूसरी ओर, उपलब्ध भारतीय आदेशों के आधार पर यह सवाल उठाया गया है कि क्या उनमें वास्तव में अमेरिकी अभियोग के केंद्र में मौजूद कथित रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच हुई थी। इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय अमेरिकी अदालत को लेना है।

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