नई दिल्ली। भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने यूएई की दिवालिया हो चुकी हेल्थकेयर कंपनी NMC Health से जुड़े बहुचर्चित कानूनी विवाद को खत्म करने के लिए 600 मिलियन डॉलर (करीब 2.2 अरब दिरहम) का भुगतान करने पर सहमति जताई है। इस समझौते के साथ अबू धाबी और लंदन में वर्षों से चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त हो जाएगी।
बैंक ने इसकी जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई नियामकीय फाइलिंग में दी। बैंक के अनुसार, यह समझौता NMC Health PLC, NMC Healthcare Ltd और NMC Holding Ltd के संयुक्त प्रशासकों (Joint Administrators) के साथ अदालत के बाहर हुआ है। भुगतान बैंक ऑफ बड़ौदा की अबू धाबी शाखा के माध्यम से किया गया।
संयुक्त प्रशासकों की ओर से यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय कानून फर्म Quinn Emanuel ने भी पुष्टि की। फर्म ने बताया कि वह Richard Fleming और Benjamin Cairns (Alvarez & Marsal) का प्रतिनिधित्व कर रही थी।
किन मामलों से जुड़ा था विवाद?
यह समझौता अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस और इंग्लैंड एवं वेल्स के हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस में चल रही दिवालियापन (Insolvency) और सिविल मामलों से संबंधित है।
NMC हेल्थ का मामला क्या है?
यूएई की प्रमुख निजी हेल्थकेयर कंपनी NMC Health वर्ष 2020 में भारी वित्तीय अनियमितताओं और अरबों डॉलर के अघोषित कर्ज के खुलासे के बाद ढह गई थी। इसके बाद कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई और दुनिया भर के कई बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से जुड़े कानूनी विवाद शुरू हुए। बैंक ऑफ बड़ौदा भी उन प्रमुख बैंकों में शामिल था, जिनके खिलाफ दावे किए गए थे।
इस 600 मिलियन डॉलर के समझौते से बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए लंबे समय से लंबित इस अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद का पटाक्षेप हो गया है।