संपादकीय….
बढ़ते तापमान की चुनौती

संजय सक्सेना
हम एक पेड़ मां के नाम और कार्बन उत्सर्जन वगैरह, वगैरह में उलझे हुए हैं और पूरी दुनिया इस समय भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रही है। भारत में जहां कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं यूरोप, एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश का बांदा तो कई बार देश का सबसे गर्म इलाका रहा है, वहां तापमान 47 और 48 डिग्री तक जा चुका है।
वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो और जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव अब पहले से ज्यादा खतरनाक, लंबी और जल्दी आने लगी हैं। यही कारण है कि जो गर्मी पहले जून में देखने को मिलती थी, अब वह मई महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई देशों में स्कूलों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। तमाम स्थानों पर गर्मी से मौतों और स्वास्थ्य संकट की घटनाएं भी सामने आई हैं।
ब्रिटेन जैसे ठंडे देश में मई महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1922 और 1944 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। भारत की बात करें तो देश में नौतपा के पहले दिन सोमवार को उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक प्रचंड गर्मी के साथ उमस से लोग बेहाल रहे। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चिलचिलाती धूप के साथ गर्म लू चलती रही। दिन के साथ रातें भी गर्म रहीं। अभी 4-5 दिन झुलसा देने वाली गर्मी के आसार बने हुए हैं। देश के उत्तर-पश्चिम में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर में दिल्ली-हिमाचल, यूपी, दक्षिण-पश्चिम में ओडिशा और तेलंगाना भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। पश्चिम में गुजरात, महाराष्ट्र और सेंट्रल इंडिया में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के एमपी से लगे हिस्से और छत्तीसगढ़ में गर्मी का सबसे खतरनाक दौर चल रहा है।
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को यूपी के बांदा और विदर्भ का ब्रह्मपुरी में सबसे ज्यादा गर्म रहे। यहां लगातार 8वें दिन 47 डिग्री से ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। छतरपुर का खजुराहो 47.2 डिग्री के साथ तीसरे नंबर पर और नौगांव 46.8 डिग्री के साथ चौथा सबसे गर्म शहर रहा। बढ़ती गर्मी के कारण पंजाब सरकार ने सरकारी दफ्तरों और स्कूलों का समय बदल दिया है। सरकारी स्कूल और दफ्तर सुबह साढ़े 7 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक खुलेंगे।
हिमाचल प्रदेश में अगले 48 घंटे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी की है। तापमान में आज और कल 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए दिन के समय खासकर मैदानी इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आईएमडी के अनुसार- आज यानी 26 मई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिलों में हीटवेव का यलो अलर्ट जारी किया गया। वहीं 27 मई को इन छह जिलों के साथ शिमला जिला में भी हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है।
बात मानसून की करें तो यह पिछले तीन दिन से केरल के तट से 30-35 किमी दूर अटका है। केरल के तटीय इलाके, तमिलनाडु और कर्नाटक में बारिश हो रही है। लेकिन, मानसून आने की सभी शर्तें पूरी नहीं हो पा रहीं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही गर्मी अपने रिकार्ड तोड़ रही है, लेकिन इस बार पर्याप्त बारिश होने के आसार बहुत ही कम हैं। लगभग आठ प्रतिशत कम बारिश की इस बार संभावना व्यक्त की जा रही है।
बढ़ते तापमान को रोकने की बात करें तो इसके बहुत ठोस प्र्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की बात करें या विश्व स्तर की, औपचारिकताओं का खेल ही चल रहा है। कागजों तक ही सब कुछ सिमट कर रह गया लगता है, तभी तो गर्मी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। कई दशकों से कहा जा रहा है कि ग्लोबल वार्मिंग हमारे जीवन को कष्टकर बना देगी, लेकिन कोई समझने तैयार नहीं।
सरकारी स्तर से लेकर कई संस्थाएं और व्यक्तिगत तौर पर भी लोग वृक्षारोपण की बात करते हैं। कुछ अभियान भी चलाए गए। एक वृक्ष मां के नाम का अभियान भी चला। लेकिन क्या ये पर्याप्त हो पाया है या हो पाएगा? असल बात तो यह है कि एक परियोजना में ही हजारों पेड़ काट डाले जाते हैं, जंगलों की सघनता खत्म हो रही है। ऐसे में इक्का-दुक्का पेड़ या वृक्षारोपण के नाम पर सांकेतिक हरियाली बहुत काम नहीं आ सकती। शहरीकरण और तेज हो गया है, जहां कहने को पार्क और छोटे-छोटे बाग या कथित जंगल भी हैं, लेकिन कांक्रीट के जंगलों को संतुलित नहीं किया जा सकता। रेल और सडक़ परियोजनाओं में भी लाखों पेड़ों की बलि ले ली जाती है, जंगल के जंगल साफ कर दिये जाते हैं, उनकी क्षतिपूर्ति नहीं हो पा रही है। अब अमेरिका का पागलपन भी जिस तरह से बढ़ रहा है, वह आधी दुनिया को तो जंग में झोंक चुका है, फिर भी शांत नहीं हो रहा है। ये जो हथियार चलाए जा रहे हैं, उनकी गर्मी धरती के तापमान को गुणात्मक रूप से बढ़ाएगी।
हरियाली के नाम पर कुछ जंगल लगा भी दिए जाएं, तो भी कुछ खास होने वाला नहीं। इसके पीछे कल-कारखानों की बढ़ती संख्या, वाहनों में गुणात्मक वृद्धि जैसे कारक भी हैं। और बढ़ती जनसंख्या इसमें सबसे बड़ा कारण और कारक है। इससे निजात पाना संभव नहीं दिखाई देता। इसमें अब राजनीति भी आ गई है। कुल मिलाकर जो माहौल बन रहा है कि हम ग्लोबल वार्मिंग को रोक नहीं पा रहे हैं और हमें आने वाले समय में और अधिक गर्मी सहन करने की आदत डालनी होगी। नहीं तो…।

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