जबलपुर। हाइकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राजधानी भोपाल निवासी आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा को राहत नहीं दी है।
यह मामला भोपाल के चर्चित सौरभ शर्मा प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें उनकी मां उमा शर्मा को लेकर विवादित जमीन आवंटन का मुद्दा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
मुख्य बिंदु:
सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है।
मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की।
याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि नोटिस जारी होने के बावजूद संबंधित पक्षों की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
कोर्ट ने अंतिम अवसर देते हुए जवाब पेश करने के लिए समय दिया और अगली सुनवाई 29 जुलाई तय की है।
विवाद क्या है?
शाहपुरा कॉलोनी हाउस ओनर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष शुभ्रा गोयल ने जनहित याचिका दायर की है।
याचिका के अनुसार, शाहपुरा सेक्टर-बी में लगभग 19,942 वर्गफुट भूमि कॉलोनी के “ओपन स्पेस” (खुले क्षेत्र) के रूप में आरक्षित थी।
आरोप है कि मार्च 2024 में यह जमीन उमा शर्मा की संस्था को स्कूल निर्माण के लिए आवंटित कर दी गई।
इसके बाद भोपाल नगर निगम ने निर्माण की अनुमति भी जारी कर दी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:
ओपन स्पेस के लिए आरक्षित भूमि का अन्य उपयोग नियमों के विपरीत है।
जमीन का आवंटन और निर्माण अनुमति दोनों कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।
इसलिए इन दोनों निर्णयों को निरस्त किया जाना चाहिए।
वर्तमान स्थिति
हाईकोर्ट पहले ही विवादित भूमि पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का अंतरिम आदेश दे चुका है।
इसका अर्थ है कि अंतिम निर्णय होने तक जमीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
अब सभी पक्षों के जवाब आने के बाद अदालत मामले की मेरिट पर आगे सुनवाई करेगी।
यह आदेश केवल अंतरिम प्रक्रिया से संबंधित है; अदालत ने अभी तक भूमि आवंटन या निर्माण अनुमति की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
