MP : आदिवासियों की ज़मीन खरीदी का सबसे बड़ा घोटाला..बीजेपी विधायक संजय पाठक ने खरीदी आदिवासियों के नाम पर 781 एकड़ ज़मीन? एसडीएम ने मजदूरों को जारी किया नोटिस

संजय सक्सेना

भोपाल। मध्य प्रदेश में आदिवासियों के नाम पर सैकड़ों एकड़ ज़मीन खरीदे जाने के यूँ तो कई मामले हो चुके हैँ, लेकिन ताज़ा मामला डिंडोरी जिले का सामने आ रहा है, जिसमें 781 एकड़ ज़मीन फर्जी तरीके से खरीदी गई।  आदिवासियों के नाम पर बंधुआ मजदूरों के नाम रजिस्ट्री कराई गई और फिर उसे खुद खरीद लिया गया। बड़ी बात ये है कि ये जमीन दुनिया के सबसे बेहतर बोक्साइट का भंडार है। एक एकड़ में अनुमान है कि कम से कम दो सौ करोड़ का अयस्क निकलेगा। इस पूरे खेल में पूर्व मंत्री और कटनी के कद्दावर भाजपा नेता संजय पाठक बताये जा रहे हैँ। पाठक के खिलाफ हाल ही में सहारा ज़मीन घोटाले में मामला दर्ज हो चुका है। डिंडोरी बैगा जनजाति बहुल है, जो विशेष संरक्षित आदिवासी वर्ग है। अब मामला जांच के दायरे में आ गया है।

बजाग एसडीएम ने ज़मीन खरीदने वाले मजदूरों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। जाँच की आंच दिल्ली तक पहुँच गई है। सूत्र दावा कर रहे हैँ कि जाँच की जाये तो कम से कम 1200 एकड़ जमीन का घोटाला सामने आ सकता हैँ, जो देश का सबसे बड़ा घोटाला होगा। ये आदिवासी जिलों में आदिवासियों के नाम पर हुआ है। सबके पीछे खनन और जंगल माफिया है। रिसोर्ट भी आदिवासियों के नाम ज़मीन खरीद कर बनाये गए हैँ।

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डिंडौरी जिले की जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया माल में बॉक्साइट खदान को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। खनन कार्य पर ग्राम पंचायत ने अभिमत देते हुए आपत्ति कलेक्टर (खनिज शाखा) को सौंप दिया है। ग्राम पंचायत के माध्यम से दर्ज कराई गई आपत्ति में लगभग एक सैकड़ा ग्रामवासियों के दस्तखत और अंगूठा निशान हंै। केंद्र सरकार की तरफ कराए गए सर्वे में यहां बॉक्साइट सहित अन्य खनिजों की उपलब्धता की जानकारी आई थी, लेकिन यहां ब्लॉक की नीलामी नहीं की गई। जानकारी के बाद निजी खनन कारोबारी सक्रिय हो गए और गांव की जमीनों की खरीद फरोख्त बड़े पैमाने पर शुरू कर दी है। ग्राम पंचायत के आदिवासी परिवारों ने धोखाधड़ी कर कम कीमत पर और फर्जी तरीके से जमीन खरीदे जाने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की थी। भूमि खरीद में गड़बडिय़ों की जांच करने और खनिज काराबारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी। इसे लेकर अब तक प्रशासन की तरफ से की गई कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किया गया। ग्राम पंचायत पिपरिया माल ने खनिज शाखा से 15 अप्रेल को जारी पत्र के संदर्भ में अभिमत देते हुए 26 अप्रैल को बॉक्साइट ब्लॉक पिपरिया (ईस्ट ब्लॉक) के खनन पर आपत्ति जताई है।

ग्राम पंचायत पिपरिया माल में 2015 से अवैध तरीक से बैगाओं की भूमि क्रय की जा रही है, जिसमें स्थानीय बजाग के बिचौलियों एवं पटवारी से लेकर भूमि पंजीयक तक सभी ने भूमि रजिस्ट्री में बैगा आदिवासियों को गलत जानकारी देकर अधिकांश रजिस्ट्री की है। भूमि स्वामी विशेष अनुसूचित जनजाति बैगा समुदाय के हैं। साथ ही भूमि पंजीयन में ग्रामसभा का अभिमत भी नहीं लिया गया।

बॉक्साइट खनन की अनुमति मांगी गई?

पता चला है कि जो जमीन आदिवासियों के नाम खरीदी गई यही, उसमें बॉक्साइटके खनन कि तैयारी हो चुकी है। कुछ हिस्से में खनन की अनुमति जल्द मिलने की उम्मीद है। एन ओ सी के लिए प्रयास प्रशासन स्तर पर चल रहे हैँ।

781 एकड़ भूमि की खरीदी

खनिज विभाग को दिए गए अभिमत में कहा गया है कि ग्राम पंचायत पिपरिया माल अंर्तगत 781 एकड़ से ज्यादा भूमि की खरीदी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि 5 प्रतिशत लोगों को ही अपनी भूमि बेचने की सही जानकारी है, जबकि 95 प्रतिशत भूमिस्वामी को गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री कराई गई है। बैगा आदिवासी अशिक्षित है, उन्हें भूमि के मूल्य के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश बैगा आदिवासियों को उनके खाते में पैसा जमा कराया जाएगा कह कर उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर भूमि की रजिस्ट्री करा ली गई है। जानकारी के अनुसार किसानों को औने पौने दाम देकर बेसकीमती भूमि की रजिस्ट्री कराने के आरोप लगाए गए हैं।

ढाई एकड़ बेची, रजिस्ट्री 20 एकड़ की हो गई

पिपरिया माल निवासी बैगा महर सिंह का आरोप है “उसने अपने 20 एकड़ में से केवल ढाई एकड़ जमीन 30 हजार रु में बेची थी लेकिन रजिस्ट्री 20 एकड़ की करवाई गई. इसकी जानकारी उन्हें बहुत देर से लगी.” ऐसे ही बैगा महिला प्रेमवती बाई का कहना है “दलालों में उनके साथ ठगी कर पूरी जमीन बिकवा दी. जमीन बिक्री का यह सिलिसला 2009 से अब तक जारी रहा.”किसी की 3 एकड़ को 13 एकड़ किया गया, इसी तर्ज पर और भी ज़मीनों की रजिस्ट्री करने में धोखाधड़ी की गई।

होटल में रजिस्ट्रार ने किये हस्ताक्षर?

बताया जा रहा है कि जिन ज़मीनों को धोखे से ख़रीदा गया, उनकी रजिस्ट्री पर अधिकारी को होटल में बुला कर हस्ताक्षर कराये गए। प्रति रजिस्ट्री एक अच्छी रकम रिश्वत के तौर पर दी गई।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने किए चौंकाने वाले खुलासे

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम ने मय दस्तावेज के बड़ा खुलासा पत्रकारवार्ता के दौरान किया. कमलेश तेकाम ने खुलासा किया “जिन 4 लोगों ने पिपरिया माल के बैगाओं की 781 एकड़ अलग अलग खरीदी हैं वे स्वयं गरीबी रेखा में जीवनयापन करने वाले मजदूर हैं, जिन्हें शासकीय राशन दुकान से अनाज मिलता है और प्रधानमंत्री आवास का लाभ भी प्राप्त कर चुके हैं तो ये इतनी जमीन कैसे खरीद सकते हैं. इन चारों के बैंक खाते में इतना पैसा भी नही हैं कि ये जमीन खरीद सकें.”

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आदिवासी संगठन ने खोला मोर्चा

रघुराज सिंह के नाम 411.50 एकड़ जमीनें खरीदी गईं…

रघुराज सिंह पिता श्यामलाल, निवासी सुतली, ने डिंडोरी जिले में लगभग 411.50 एकड़ जमीनें 2015 से अब तक खरीदी है। इनके मूल ग्राम में खसरा क्रमांक 290/3, 290/6, 342/1 और 174/3 में 3.33 हे. भूमि कुल 8.22 एकड़ जमीन चार लोगों के हिस्से में है रघुराज, रतन, उमा और रेणुका पिता श्यामलाल। इस तरह यह जमीन जो इनकी पैतृक भूमि है उसमें से रघुराज सिंह के हिस्से में 2. 05 एकड़ जमीन है। यह जमीन 27/7/2015 से पैक्स पिपरियाकला द्वारा कृषि उपज की दृष्टिबंधक है। इसके अलावा रघुराज सिंह को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 8/4/2022 में पक्का मकान बनाने के लिए 1.20 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। रघुराज सिंह का परिवार गरीबी रेखा के नीचे की सूची में दर्ज था और अपने राशन कार्ड द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत राशन प्राप्त करता रहा है। इनके द्वारा उचित मूल्य दुकान मोहनी से शासकीय योजना का राशन लिया जाता रहा है। 17 जनवरी 2022 को इन्होंने जनवरी और फरवरी माह का राशन 30 गेहूं, 20 किलो चावल, 2 लीटर केरोसिन, 2 किलो नमक के साथ ही साथ ही साथ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना अंतर्गत 30 किलो गेहूं और 20 किलो चावल बायोमेट्रिक लगा कर प्राप्त किया, ये इसी समय काल में डिंडोरी जिले में 411.50 एकड़ जमीन खरीदते है यह जांच का विषय है।

राकेश के नाम 85.63 एकड़ जमीनें खरीदी

राकेश पिता मोलई, निवासी ग्राम बरमानी, बड़वारा जिला कटनी, ने पिपरिया माल और बघरेली में 85.63 एकड़ जमीनें खरीदी है। इनको 4/4/ 2018 में पक्का मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपए की स्वीकृति प्राप्त हुई। मूल गांव बरमानी में इनकी मई 3.65 एकड़ जमीन पुस्तैनी है। उक्त व्यक्ति का परिवार मनरेगा अंतर्गत अकुशल मजदूर है। इनके जॉब कार्ड के अनुसार राकेश सिंह ने 27/5/2023 तक मनरेगा में मजदूरी की, पुत्री 25/12/2024 तक कार्य करती रही पत्नी सुमित्रा बाई का नाम 21/04/2025 तक मस्टर में दर्ज है। राकेश सिंह को 13/6/2023 को 7 दिनों का मजदूरी भुगतान 1435 रुपए उनके सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सलैया सिहोरा के खाते में किया गया। पुत्री को 817 रु. का मजदूरी भुगतान और 2/6/2023 को इसी खाते में पत्नी को 1200 रु. मजदूरी भुगतान किया गया।

नत्थू के नाम 179.53 एकड़ जमीनें खरीदी

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ये है नत्थू का घर, जिसके नाम 179.53 एकड़ जमीन खरीदी गई

नत्थू पिता राममिलन, निवासी गोइंद्रा, तहसील विजयराघवगढ़, जिला कटनी इस क्रम में तीसरे व्यक्ति है, जिन्होंने डिंडोरी जिले के पिपरिया माल और हर्रा टोला रैयत में 70.66 हे. यानी कुल 179.53 एकड़ जमीनें खरीदी है। इनकी इनके मूल ग्राम गोइंद्रा में 6 खसरों में अविभाजित भूमि दर्ज है, इनके हिस्से में कुल 0.820 हे. अर्थात कुल 2.02 एक्स जमीन है।
इनके परिवार के 6 सदस्य राशन कार्ड में दर्ज है जिन्हें उचित मूल्य पर शासन की योजनांतर्गत राशन प्रदाय किया जा रहा है जो कि प्रदेश सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को ही देती है। 22 अप्रैल 2024 को इनके परिवार ने 12 किलो गेहूं, 18 किलो चावल और 1 किलो नमक का उठाव किया है। इनका परिवार भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना का पात्र लाभार्थी है जिसे सरकार की योजना का लाभ उसी समय में दिया गया जब इनके नाम पर जिले में सैकड़ों एकड़ जमीन खरीदी जा रही थी।

अनुसूचित जाति के हैँ, आदिवासी कि ज़मीन खरीदी?

रघुराज सिंह के पिता श्यामलाल, राकेश के पिता मोलाई, नत्थू की पत्नी फूलबाई के जॉब कार्ड में इन्हें अनुसूचित जाति का दर्शाया गया है इस आधार पर तो ये बैगा और आदिवासियों की जमीनें खरीद ही नहीं सकते। पंजीयक कार्यालय में इनके जाति प्रमाणपत्र और इनके मूल गांव से इनकी जाति के संबंध में जांच की जावे। नत्थू कोल जाति के है किंतु डिंडोरी के राजस्व रिकॉर्ड में इनकी जाति गोंड दर्ज की गई है जो संदिग्ध है।

एसडीएम ने भेजा नोटिस, जांच होगी

इनकी आय, बैंक खातों, जमीनें खरीदने के लिए इन्होंने कैसे करोड़ो रुपया जुटाया? इनकी आय वैध है या अवैध? इनका डिंडोरी जिले में जमीनें खरीदने का प्रयोजन क्या था? इन्होंने ये जमीन सिर्फ बॉक्साइट के खदान ठेकेदार को लीज पर देने की सुनियोजित योजना के तहत ही करोड़ो की जमीनें खरीदी या कोई और भी उद्देश्य था जो उन्होंने अपने मूल जिले से बाहर आकर जमीनें खरीदी? इन सवालों का जवाब अब इन लोगों को देना होगा. इस सम्बन्ध में एसडीएम की तरफ से नोटिस जारी किया गया है. चारों खरीददारों की अब पूरी जांच की जाएगी।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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