अशोक चतुर्वेदी
पहले राम राज्य था। अब साम्राज्य है।
नाम दोनों में “राज” है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले राज “मर्यादा” से चलता था, उसे मार्केट का रावण उठा ले गया। अब राज “मार्केट” से चलता है।
राम राज्य में राजा सुबह उठकर पूछता था “मेरी प्रजा में कोई भूखा तो नहीं सोया?”
साम्राज्य में राजा सुबह उठकर पूछता है “मेरा नाम ट्रेंड कर रहा है कि नहीं ?”
पहले राजा का सिंहासन कर्तव्य पर टिका था। अब सिंहासन PR पर टिका है।
पहले गलती हो जाए तो राजा वनवास चला जाता था। अब गलती हो जाए तो स्पोक्सपर्सन प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया के जरिए धो पोंछ देता है।
मर्यादा चली गई, मैनेजमेंट आ गया। त्याग चला गया, टारगेट आ गया।
राम राज्य में लोग “प्रजा” थे। मतलब परिवार के सदस्य। साम्राज्य में लोग “कस्टमर” हैं। मतलब बिक्री का आंकड़ा।
पहले राजा बोलता था “मैं तुम सबका हूं”।
अब सिस्टम बोलता है “तुम सब मेरे यूजर हो”।
पहले समस्या होती थी तो राजा दरबार लगाता था। अब समस्या होती है तो कस्टमर केयर का नंबर देता है। होल्ड पर बैठो, समाधान आ जाएगा। शायद अगले जन्म में।
प्रजा पूछती थी-“धर्म क्या है?” इधर
कस्टमर का सवाल है “डिस्काउंट कब और कितना है?”
समाज का स्तर ऊपर नहीं गया, सिर्फ स्कीम ऊपर चली गई।
राम राज्य की नींव थी मर्यादा। मर्यादा ,मतलब सीमा।
साम्राज्य की नींव है मार्केटिंग। मार्केटिंग, मतलब सीमा तोड़ो।
पहले बेटा बाप से पूछता था “पिताजी, क्या सही है?”
अब बेटा गूगल से पूछता है “सर, क्या वायरल है?”
पहले गुरु शिष्य को चरित्र देता था। अब इन्फ्लुएंसर फॉलोअर को फिल्टर देता है।
हमने त्याग को बोरिंग बना दिया। भोग को ट्रेंडिंग बना दिया।
राम ने 14 साल जंगल काटा। हम 14 सेकंड की रील पर राज्य पा लेते हैं।
फिर बोलते हैं “कलियुग आ गया”। कलियुग नहीं आया मित्र, कलियुग को तो हमने EMI पर बुलाया।
राम राज्य में धर्म का मतलब था “जो धारण करे”। मतलब जिम्मेदारी।
साम्राज्य में धर्म का मतलब हो गया “जो ट्रेंड करे”। मतलब भीड़।
पहले मंदिर में घंटी बजती थी, आदमी अंदर झांकता था। अब मोबाइल से नोटिफिकेशन बजती है, आदमी बाहर भागता है।
पहले कहा जाता था “सत्य बोलो”। अब कहा जाता है “सिर्फ वही बोलो जो बाजार को पसंद आए”।
समाज बदल गया। पहले लोग मोक्ष के लिए तपस्या करते थे। अब लोग मोनेटाइजेशन के लिए तपस्या करते हैं। हर दिन 16 घंटे काम करने की वकालत करते हैं।
आईना देखोगे तो पाओगे कि राम राज्य गया, क्योंकि राम जैसे लोग कम हो गए।
साम्राज्य आया क्योंकि साम्राज्य जैसे लोग ज्यादा हो गए।
राम राज्य एक सोच थी। “पहले कर्तव्य, फिर अधिकार”।
साम्राज्य भी कोई जगह नहीं है, वो भी एक सोच है। “पहले अधिकार, फिर कर्तव्य कौन देखेगा”।
नोट कर लेना-कोई राज्य ,राम की वजह से नहीं बनता, राज्य तुम्हारी वजह से बनता है। इसलिए जिस दिन हर घर में एक राम पैदा होगा, उस दिन फिर राम राज्य होगा।
और जिस दिन हर घर में सिर्फ साम्राज्य का सपना होगा, उस दिन घर ही जेल बन जाएगा।
तो बताओ – तुम राज्य बचा रहे हो या साम्राज्य बनाने जा रहे हो?
बैलेट से नहीं, अपनी रोज की छोटी छोटी चॉइस से।
क्योंकि सिंहासन दिल्ली से नहीं तुम्हारे दिल से चलता है।असल मालिक ,तुम्हारे मन में बैठता है।
सोशल मीडिया से साभार