Social Media : अपनों का भरोसा खोती भाजपा

** 1984 की एक बात याद आ गई। भाजपा ने अपने कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेई को ग्वालियर से चुनाव लड़ाना तय किया। नामांकन के अंतिम दिन अंतिम क्षणों में कांग्रेस ने माधवराव सिंधिया का पर्चा ग्वालियर से भरवा दिया। I
**  सिंधिया का निर्वाचन क्षेत्र गुना था। इस अचानक सामने आए घटनाक्रम के बाद भाजपा रणनीतिकारों ने अटल जी का दूसरा पर्चा कोटा ( राजस्थान) से भरवाने की कोशिश की। समय के अभाव व ग्वालियर से कोटा की दूरी के चलते यह संभव नहीं हो पाया।

**अटल बिहारी वाजपेई यह चुनाव हार गए। हालांकि हार के बाद भी उन्होंने ग्वालियर की जनता से ” डोर टू डोर” संपर्क किया और उन मददाताओं का आभार जताया जिन्होंने उन्हें वोट दिया था। बाद में चुनावी हार की समीक्षा में यह दिलचस्प तथ्य सामने निकल कर आया कि जिनके पति जी जान से दिन रात अटल जी के प्रचार में लगे हुए थे, उनकी घरवालियों ने भी माधव राव सिंधिया की छवि, ग्लैमर से प्रभावित होकर उन्हें वोट दिया था।

** अब यह दूसरा दिलचस्प घटनाक्रम भी ग्वालियर चंबल की धरती से ही निकल कर आया है। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा की श्रीमती जी ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर भाजपा पर करारा हमला बोला है।
**  हालांकि इस स्क्रीन शॉट पर खांटी पत्रकार Ravindra Jain के पोर्टल सबकी खबर की सील लगी हुई है।… पर इसे मैंने उठाया जाने माने पत्रकार युवा पत्रकार Neeraj Nayyar  की फेस बुक वॉल से।

** हाल ही में चंद रोज पहले आप इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का आलेख तो भूले नहीं होंगे। मोदी सरकार में विभिन्न पदों पर रहे इस नामचीन अर्थशास्त्री ने तरीके से बदहाल होती आर्थिक हालात की बखिया उधेड़ी है। अब दूसरा मामला यह है जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के घर से अविश्वास के स्वर उठे हैं। विपक्ष तो खैर पिछले काफी समय से सरकार की नाकामियों को लेकर भांगड़ा कर ही रहा है।
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