MP: पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री और अफसर भी घोटाले में शामिल रहे..? जांच के दायरे में लाएंगे क्या मुख्यमंत्री…?
भोपाल । मध्य प्रदेश के नर्सिंग घोटाले की निष्पक्ष जांच हुई तो पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और विभाग के बड़े अधिकारी तक आंच पहुंच सकती है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह ने हाल ही में ये मामला उठाया भी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले को लेकर उच्चस्तरीय बैठक भी ली है। इस बीच ये खबर भी आ रही है कि प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच सीबीआई की नई टीम कर सकती है।
सीबीआई यह फैसला अपने रिश्वतखोर अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद ले सकती है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई मुख्यालय की एक नई टीम भोपाल भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच का जिम्मा ले सकती है। अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी धन शोधन के पहलू से समानांतर जांच शुरू कर दी है। जल्द ही पीएमएलए के तहत एक अलग मामला दर्ज किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार डेढ़ साल पहले जब चिकित्सा शिक्षा विभाग के पूर्व सचिव जॉन किंग्सली ने नर्सिंग घोटाले की परतें उघाडऩा शुरू किया था, तो किंग्सली को विभाग से चलता कर दिया गया था। इधर, हाल ही में पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब तक भाजपा शासन काल मे जितने चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे उन सभी ने ऐसे कॉलेजो को मान्यता दी. पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि बताया गया कि इसके बदले सीधा एलान था दस लाख दो और मान्यता लो।
उन्होंने इसको लेकर सीधे सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि रुपए लेकर फर्जी कॉलेजों को मान्यता देने वाले तत्कालीन चिकित्सा शिक्षामंत्री और अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए। डॉ सिंह ने मांग की कि उनकी प्राथमिक जांच कर उनको भी गिरफ्तार किया जाए. जिन्होंने लोगों का जीवन बर्बाद कर भ्रष्टाचार किया है. उनकी भूमिका की जांच सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी द्वारा की जाए और सही दोषी को जिन्होंने मान्यता दी है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

डॉ सिंह ने मांग की कि उनकी प्राथमिक जांच कर उनको भी गिरफ्तार किया जाए. जिन्होंने लोगों का जीवन बर्बाद कर भ्रष्टाचार किया है. उनकी भूमिका की जांच सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी द्वारा की जाए और सही दोषी को जिन्होंने मान्यता दी है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।





