MP: ये शाम मस्तानी..अव्यवस्थाओं के साए में हुआ कार्यक्रम.. वीआईपी पास बेचे गए..? संस्कृति विभाग फेल…!

भोपाल। रविवार शाम को रविंद्र कन्वेंशन सेंटर में गायक पवनदीप राजन और अरुणिता कांजीलाल के प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन संस्कृति विभाग व्यवस्था करने में पूरी तरह फेल हो गया। मंत्री के बंगले तक से vip पास बेचने की खबर चली और रविंद्र भवन में पुलिस को प्रशंसकों के साथ जोर आजमाइश करनी पड़ी। महिलाओं से झूमा झटकी हुई,कई लोग तो बिना शो देखे ही लौट गए।

यह महान पार्श्व गायक और अभिनेता किशोर कुमार की जयंती के अवसर पर संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित संगीत कार्यक्रम ‘ये शाम मस्तानी’ का हिस्सा था। पर संस्कृति विभाग ने व्यवस्था के मामले में हाथ खड़े कर दिए। प्रदेश का संस्कृति विभाग वैसे भी दलालों के सहारे चल रहा है, मंत्री भी अफसरों और दलालों के आगे घुटने टेक चुके हैं।

इंडियन आइडल के दो कलाकारों ने कार्यक्रम में खचाखच भरे हॉल में प्रस्तुति दी। प्रशंसकों की सुविधा के लिए कन्वेंशन सेंटर के 500 सीटों वाले अंजनी ऑडिटोरियम में एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी। लेकिन, कुछ ही देर में वह भी भर गई। दोनों कलाकारों के प्रति लोगों में इतनी दीवानगी थी कि कार्यक्रम शुरू होने से दो घंटे पहले ही बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए।

पॉलिटेक्निक स्क्वायर वीआईपी रोड, न्यू मार्केट में भारी ट्रैफिक जाम देखा गया। यहां तक कि पवनदीप को भी ट्रैफिक जाम के कारण कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में देरी हो गई। वह 15 मिनट तक जाम में फंसे रहे।पवनदीप से जब उनके कार्यक्रम में आने के क्रेज के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता था कि भोपाल में मेरे इतने बड़े प्रशंसक हैं।’

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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