MP: खंडवा जल संकट: फेल हुई 120 करोड़ रुपये की नर्मदा जल परियोजना, 300 से ज्यादा बार फुटी पाइप लाइन

खंडवा। मध्य प्रदेश का खंडवा (Khandwa) जिला इन दीनों भीषण जल संकट (Severe Water Crisis) से जूझ रहा है. जबकि, जिले के पास इंदिरा सागर जलाशय जैसा बड़ा पानी का भंडार मौजूद है. इसी जलाशय से खंडवा में जलापूर्ति करने के लिए 120 करोड़ रुपए की नर्मदा जल योजना बनाई गई थी. लेकिन, उसके बाद भी खंडवा अब तक पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है. अब इस मामले को लेकर कांग्रेस सीबीआई जांच करने की मांग कर रही है।

साल 2009 में मनमोहन सरकार में मंत्री, खंडवा से सांसद अरुण यादव ने केंद्र सरकार से खंडवा में पेय जल समस्या को दूर करने के लिए नर्मदा जल परियोजना स्वीकृत कराई। यह योजना उस समय 120 करोड़ रुपए की थी. लेकिन, मध्य प्रदेश सरकार और तत्कालीन खंडवा नगर निगम परिषद ने इसमें फेरबदल कर इस योजना को पब्लिक प्राइवेट मोड में परिवर्तित कर दिया था. इसके पीछे तर्क था कि ऐसा करने से लगभग 45 करोड़ रुपए की बचत होगी. इतना ही नहीं, पैसे बचाने के लिए योजना में लगने वाला जीआई पाइप, यानी लोहे के पाइप की जगह प्लास्टिक के पाइप लगा दिए गए।

यही निर्णय खंडवा नगर निगम के लिए सर का दर्द बन गया. अब आए दिन प्लास्टिक के पाइप क्रैक हो जाते हैं या फुट जाते हैं. जिसके चलते वाटर सप्लाई में दिक्कत आती है. लोग पानी नहीं मिलने से अपने काम धंधे तक पर नहीं जा पा रहे हैं।

पानी के लिए तरस रहे लोग
2009 में स्वीकृत हुई इस योजना का पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विश्व कंपनी के साथ अनुबंध किया गया. इस अनुबंध में कहा गया था कि खंडवा को हर रोज साफ और स्वच्छ पीने योग्य पानी मिलेगा. वह भी तीसरी मंजिल तक बिना किसी मोटर के सहारे पानी दिया जाएगा. लेकिन, अब यहां पानी की हालत यह है कि तीसरी मंजिल तो क्या, नलों में भी पानी नहीं आ पा रहा है… बता दें कि 2013 से इस योजना के तहत शहर में जल वितरण का कार्य शुरू किया गया था. 2014 के बाद से पूरे शहर में पाइप लाइन बिछा कर जल वितरण किया जा रहा है. लेकिन, तब से अब तक लगभग 300 से ज्यादा बार नर्मदा जल की पाइपलाइन फुट चुकी है।

पानी के लिए तरस रहे लोग
2009 में स्वीकृत हुई इस योजना का पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विश्व कंपनी के साथ अनुबंध किया गया. इस अनुबंध में कहा गया था कि खंडवा को हर रोज साफ और स्वच्छ पीने योग्य पानी मिलेगा. वह भी तीसरी मंजिल तक बिना किसी मोटर के सहारे पानी दिया जाएगा. लेकिन, अब यहां पानी की हालत यह है कि तीसरी मंजिल तो क्या, नलों में भी पानी नहीं आ पा रहा है… बता दें कि 2013 से इस योजना के तहत शहर में जल वितरण का कार्य शुरू किया गया था. 2014 के बाद से पूरे शहर में पाइप लाइन बिछा कर जल वितरण किया जा रहा है. लेकिन, तब से अब तक लगभग 300 से ज्यादा बार नर्मदा जल की पाइपलाइन फुट चुकी है।

300 बार फुट चुकी है पाइपलाइन
नर्मदा योजना की पाइपलाइन को सुधारने में एक बार का खर्च लगभग ढाई लाख रूपए आता है. इस लिहाज से देखें तो, अब तक 7.30 करोड़ रुपए इसके मरम्मत पर खर्च हो चुके हैं. वहीं, दो बार शहर में डिस्ट्रीब्यूशन के लिए नेटवर्क लाइन को बढ़ाया जा चुका है. इतना ही नहीं, पुराने जल स्रोत सुक्ता जल प्रदाय केंद्र को भी अपडेट कर इसमें करीब 61 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं. यानी, 45 करोड़ पर बचाने के चक्कर में खंडवा नगर निगम अब तक 90 करोड़ से ज्यादा का खर्च कर चुकी है. इसके बाद भी समस्या का हल होते नहीं नजर आ रहा।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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