MP ka Pancahayati raj: किला पंचायत.. यानि पॉलिथीन का मकान, दूसरे के घरों में मजदूरी… ये है सरपंच भुमानी बाई
टीकमगढ़। मध्य प्रदेश में भले ही त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था है। पंचायत के मालिक सरपंच होते हैं। सरपंच का चुनाव जनता करती है। चुनाव जीतने के बाद पंचायत में सरपंच का ही राज चलता है। बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में ये सब कुछ कहने की बात है। हकीकत इससे इतर है। बुंदेलखंड में एक अलग से व्यवस्था चलती है। इस व्यवस्था को बुंदेलखंड में किला पंचायत कहते हैं। किला पंचायत में जनता की चुनी हुई सरपंच या तो मजदूरी करती है या फिर किसी दबंग के यहां जानवरों का गोबर उठाकर फेंकती है और अपने परिवार का भरण पोषण करती है।
आइए हम आपको एक ऐसे ही पंचायत के बारे में बताते हैं, जिसकी सरपंच आदिवासी महिला है। उसकी सील को गिरवी रख लिया गया है, जिसे किला पंचायत कहते हैं। इस पंचायत में आदिवासी महिला सरपंच को पता नहीं कि उसकी ग्राम पंचायत में कितने विकास कार्य चल रहे हैं। न ही वह आज तक बैंक में पैसे निकालने गई है। वह अपने दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी पर आश्रित है । पंचायत सचिव ही सारा काम करता है। वह महिला सरपंच की सील और साइन के लिए सिर्फ उनके घर आता है।
सरकारी कार्यालय का मुंह तक नहीं देखा
आदिवासी महिला सरपंच ने कहा कि जब से वह सरपंच का चुनाव जीती हैं, इसके बाद उन्होंने किसी भी सरकारी कार्यालय का मुंह नहीं देखा है। ग्राम पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक सिर्फ उनके पास हस्ताक्षर कराने के लिए आते हैं। सरपंच कहती हैं कि मुझे नहीं पता है कि ग्राम पंचायत में कितने विकास कार्य चल रहे हैं। विकास कार्य में सरकार द्वारा कितनी राशि दी गई है, उसे नहीं पता है।
पॉलिथीन के मकान में रहती है सरपंच
महिला आदिवासी सरपंच की हालत ऐसी है कि वह आज भी पॉलिथीन से बने मकान में रहती है। इस तस्वीर को देखकर आप सोचने को मजबूर हो जाएंगे। सरपंच दूसरे के लिए पीएम आवास योजना स्वीकृत करती है लेकिन खुद के लिए घर नहीं है। छप्पर का कच्चा मकान बना हुआ है लेकिन उनके पास छप्पर को भी ठीक कराने के लिए पैसे नहीं हैं। बरसात के मौसम में घर में पानी आता है इसलिए उन्होंने पॉलिथीन लगा ली है। इसी तरह उनके खाने के लाले पड़े हैं।
मजदूरी से भरता है पेट
सरपंच भूमानी कहती हैं कि उनकी स्थिति दयनीय हैं, जब बेटे मजदूरी करके लाते हैं, तब उनके घर में चूल्हा जलता है।उन्हें शासकीय उचित मूल की दुकान से 5 किलो गेहूं भी नहीं मिलता है क्योंकि जब वह सरपंच बनी तो उनका राशन कार्ड से नाम काट दिया गया। रोजगार सहायक पूरी सरपंची चला रहा है। सरपंच अपने अधिकारों से वंचित हैं।
पंचायती राज अधिनियम क्या है
भारत के संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम 1992 के अनुरूप प्रदेश में मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 25 जनवरी 1994 को लागू किया गया था। इसमें त्रिस्तरीय पंचायती राज की व्यवस्था की गई थी। सबसे पहले ग्राम पंचायत इसके बाद जनपद पंचायत और जिला पंचायत प्रमुख है।टीकमगढ़ जिले में ऐसा नहीं है, यहां पर दलित और आदिवासी सरपंच जो चुने जाते हैं, उनकी पंचायत किला से चलती है यानी की दबंग संचालित करते हैं। जबकि भारत सरकार ने पेसा एक्ट लागू करके संविधान की पांचवी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिकार संपन्न बनाकर प्रशासन का अधिकार दिया है, जिससे स्थानीय जनजातीय के जल जंगल और जमीन पर अधिकार और संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। इस कानून को भी मध्य प्रदेश में लागू किया गया है।
अधिकारी बोले करेंगे कार्रवाई
जनपद पंचायत पलेरा के सीईओ सिद्ध गोपाल वर्मा ने फोन पर बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने सोमवार की सुबह से टीम ग्राम पंचायत भेजी है। इसके साथ ही मंगलवार को मैं स्वयं वहां पर जाकर के जनसुनवाई करूंगा। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह का मामला जांच में सही पाया जाता है तो सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरपंच को आवास दिलाने का प्रयास किया जाएगा उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में उस आदिवासी महिला को क्यों आवास नहीं मिला है, यह जांच का विषय है। मेरा प्रयास होगा कि उसको प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध हो।
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