MP: इंदौर के दो कॉलेज से पेपर लीक की आशंका:DAVV कुलपति बोलीं- कटे हुए आए थे संघवी कॉलेज के लिफाफे, पुलिस रिपोर्ट के बाद लेंगे निर्णय

इंदौर । इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के MBA फर्स्ट सेमेस्टर के पेपर लीक मामले में बीजेपी नेता अक्षय बम के आयडलिक कॉलेज के अलावा संघवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। कॉलेज से वापस मंगवाए गए पेपर के बंडल कटे हुए मिले हैं। कुलपति ने कहा है कि संघवी कॉलेज की बड़ी गलती है। हो सकता है पेपर दो जगह से लीक हुआ हो। मामले में अब संघवी कॉलेज की मुश्किलें बढ़ गई है।

मामला क्या हैo
दरअसल, 25 मई और 28 मई को हुए MBA के दोनों पेपर एक दिन पहले ही लीक हो गए थे। मामले में अक्षय बम के आयडलिक कॉलेज के कम्प्यूटर ऑपरेटर का हाथ होने का खुलासा हुआ था। उसे और दो छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। मामले की जांच के लिए यूनिवर्सिटी ने कमेटी गठित की थी जिसने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिस पर कार्यपरिषद की बैठक में चर्चा हुई। रिपोर्ट के आधार पर आयडलिक कॉलेज पर 5 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। 3 साल के लिए उसे परीक्षा केंद्र नहीं बनाने का निर्णय भी लिया गया। संबद्धता निरस्त करने के संबंध में एक अन्य गठित जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। तब इस पर फैसला होगा।
दूसरी ओर इस मामले में संघवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस का नाम भी सामने आया है। पेपर आउट होने के बाद एमबीए की परीक्षा यूनिवर्सिटी ने निरस्त कर दी थी। शेष परीक्षाओं के पेपर के बंडल वापस मंगवाए थे, जिसमें संघवी कॉलेज का बंडल कटा हुआ निकला। इसे जांच कमेटी ने संदिग्ध माना है। कॉलेज ने जवाब में कहा कि उसे बाद में सूचना मिली थी। कुलपति ने आशंका जताते हुए दो जगह से पेपर लीक होने की बात कही है।
13 हजार छात्रों को दोबारा देना होंगे दो परचे
एमबीए फर्स्ट सेम की परीक्षा पहले ही साढ़े तीन माह की देरी से हुई थी। 13 हजार छात्राें काे दाे परचे दोबारा देना हाेंगे। इस वजह से सेकंड सेमेस्टर की पढ़ाई समय पर शुरू नहीं हाे पाएगी। परिणाम में भी देरी होगी। अगला सेमेस्टर कम से कम दाे माह लेट हाेगा।

कॉलेज ने गलती स्वीकारी, पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं?
बड़ा सवाल यह है कि जब कॉलेज लिखित में दे चुका है कि उसने परचे थाने नहीं भेजे थे। वे प्राचार्य कक्ष में ही रखे थे। फिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। एक दशक बाद उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यपरिषद बैठक में शामिल हाेने पहुंचे। हमेशा आयुक्त के प्रतिनिधि के तौर पर डायरेक्टर हायर एजुकेशन ही शामिल होते हैं। बुधवार को आयुक्त डॉ. निशांत वरवड़े बैठक में शामिल हुए। बैठक में काेई बहस हुए बिना निर्णय कैसे ले लिया गया?
कॉलेज पर 5 लाख की पैनल्टी लगाई है। कॉलेज काे तीन साल के लिए एक्जाम सेंटर नहीं बनाने का भी निर्णय हुआ है। पुलिस कार्रवाई के आधार पर भी सख्ती करेंगे। – डॉ. निशांत वरवड़े, आयुक्त, उच्च शिक्षा

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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