MP: Bhopal नगर निगम में एक और बड़ा भ्रष्टाचार, मजदूरों की।मौत बताकर करोड़ों डकारे, लोकायुक्त ने दर्ज किया मामला, 123 में से 95 का रिकॉर्ड ही गायब कर दिया
भोपाल। भोपाल नगर निगम में एक और बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होने पर लोकायुक्त ने केस दर्ज किया है। भोपाल नगर निगम के इतिहास में यह सबसे बड़ा भ्रष्टाचार बताया जा रहा है।निगम में मृत्यु सहायता के नाम पर गड़बड़ी सामने आई है। निगम के अफसरों ने साठगांठ कर जीवित कर्मचारी को मृत बताकर पेमेंट कर दिया। इस तरह करीब दो करोड़ की गड़बड़ी सामने आई है।
लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच में 118 प्रकरणों को संदिग्ध पाया था। जांच के बाद पुलिस ने आठ जोनल अधिकारी, छह वार्ड प्रभारी सहित 17 लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है।
सवा सौ मजदूरों की मौत की।फाइलें बनीं
भोपाल नगर निगम के अलग-अलग जोन में लगभग सवा सौ पंजीकृत मजदूरों की मौत की फाइलें तैयार की गई। इन्हें भवन संनिर्माण एवं कर्मकार मंडल में भेजकर श्रमिकों को मिलने वाली सहायता राशि का भुगतान ले लिया। गड़बड़ी के लिए श्रमिकों का मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनाकर फाइल में लगाया गया। गड़बड़ी करने वालों ने भ्रष्टाचार की राशि अपने किसी परिचित या श्रमिक के खाते में डलवाई।
95 प्रकरणों की फाइल ही नहीं मिली
विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त ने जब जांच के लिए 118 संदिग्ध मामलों की फाइलें नगर निगम भोपाल से मांगी, तो इनमें 23 प्रकरणों की फाइलें ही लोकायुक्त पुलिस को उपलब्ध कराई गईं। अन्य 95 श्रमिकों की फाइलें नगर निगम के रिकार्ड में मिली ही नहीं। फाइल गायब होने के आधार पर ही पुलिस ने आरोपित बनाए हैं। इनके विरुद्ध दर्ज हुई एफआइआर सत्यप्रकाश बड़गैया तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन 14, परितोष रंजन परसाई तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन -चार, अवधनारायण मकोरिया तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन -11, मयंक जाट तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन -19, अभिषेक श्रीवास्तव तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन -नौ, सुभाष जोशी तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन -20, मृणाल खरे तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन -17 और अनिल कुमार शर्मा तत्कालीन जोनल अधिकारी जोन तीन, तत्कालीन वार्ड प्रभारी अनिल प्रधान, चरण सिंह खगराले, शिवकुमार गोफनिया, सुनील सूर्यवंशी, मनोज राजे और कपिल कुमार बंसल, कंप्यूटर ऑपरेटर सुधीर शुक्ला, नगर निगम कर्मचारी नवेद खान व 29 दिवसीय कर्मचारी रफत अली।
गड़बड़ियां मिली
जोनल अधिकारियों ने अपने जोन के अतिरिक्त अन्य जोन के हितग्राहियों का ऑनलाइन लाग-इन कर भुगतान किया। जोनल अधिकारियों ने भुगतान संबंधी फाइलों का संधारण नहीं किया। – कई प्रकरणों में दस्तावेजों में हेरफेर या कूटरचित दस्तावेजों का निर्माण कर भुगतान करना पाया गया। जोनल अधिकारियों ने त्रुटिपूर्ण या गलत बैंक खातों में भुगतान किया। भवन संनिर्माण एवं कर्मकार मंडल ने भी ऐसे संदिग्ध प्रकरणों पर ध्यान नहीं दिया।
संबल योजना में मिलती है इतनी अनुग्रह राशि
श्रमिक की दुर्घटना में मौत होने पर चार लाख सामान्य मौत पर- दो लाख रुपये स्थायी अपंगता पर- दो लाख रुपये आंशिक स्थायी अपंगता पर एक लाख रुपये।





