MP: खंडवा में 301 करोड़ का बांध 5 साल से अधूरा, 200 करोड़ खर्च के बाद भी आज पास के गांवों में बाढ़ का खतरा
खंडवा। आदिवासी क्षेत्र की फसलों को सींचने के लिए सालभर पानी मिले इसके लिए सरकार ने 14 गांव के करीब 40 हजार किसानों के लिए 301 करोड़ रु. से बांध का निर्माण शुरू किया। पांच साल में राजगढ़ में भाम नदी पर बने बांध पर 200 करोड़ रु. खर्च भी हो गए और वह अब भी अधूरा है। विभाग की लाइट एंड विद्युत मशीनरी टीम को बिजली की लाइन डालने का जो काम निर्माण के समय करना था वह बांध की दीवारों में छेद कर बाद में किया गया। ऐसे में तकनीकी रूप से बांध की दीवारें कमजोर हो गईं।
अगर बारिश के समय बांध में पानी का भराव होता है तो दीवारों से रिसाव और इससे जुड़े आस-पास के गांवों में बाढ़ की संभावना बढ़ जाएगी। बांध का निर्माण साल 2029 से करवाया जा रहा है। विभाग के अनुसार बांध बनाने की डेडलाइन 2023 थी। बांध की क्षमता 29.73 मिलियन क्यूबिक मीटर है जबकि इसका दायरा 10 से 15 किमी तक है। टोटल रकबा 857.66 हेक्टेयर है।
तकनीकी खामियों व फसलों होने से काम में देरी
जिला जल संसाधन अधिकारी नीलम मेढ़ा ने बताया कि बांध का प्रोजेक्ट 301 करोड़ रु. का है। इसकी डेडलाइन 2023 थी लेकिन कुछ तकनीकी कारणों, सीजन में खेतों में फसलें होने से पाइप लाइन नहीं बिछा पाने की स्थिति में इसे बनाने में एक साल की देरी हुई है। बांध में कुछ तकनीकी खामियां हैं जिन्हें फाइनल स्टेज पर सुधार लिया जाएगा। फिलहाल पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है।
जमीन डूब में गई, मुआवजा नाममात्र मिला
भाम नदी पर बांध बन जाने से ग्राम राजगढ़, बराड़, सेमल्या, लोनार, सरमेश्वर सहित करीब एक दर्जन गांव के किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन डूब में आ गई। किसान सुंदरलाल, बंशीलाल ने बताया भाम नदी से लगा 8 एकड़ खेत था, जिसमें कुआं भी था, लेकिन जमीन डूब में आने से शासन ने हमसे खेत 4 लाख रु. एकड़ में खरीद लिया। ऐसे में हम कोई और जमीन खेती के लिए नहीं खरीद पाए।



