निजी बसों में स्टाफ की गुंडागर्दी, यात्रियों से अभद्र व्यवहार की इंतहां

भोपाल। मध्यप्रदेश में परिवहन निगम बंद होने से यात्रियों की जितनी फजीहत हो सकती है, उतनी हो रही है। अधिकांश निजी बसों में कर्मचारियों के नाम पर गुंडे-बदमाशों को रखा जाता है, जो यात्रियों से दादागिरी से बात करते हैं। भोपाल के कुछ ट्रैवल्स संचालकों के नाम पर तो इंदौर तक दादागिरी झाड़ी जाती है।
एक ताजा मामला 8 जुलाई को सामने आया। शुरुआत होती है हलालपुर बस स्टैंड से। यहां एक बस भोपाल से इंदौर जाने के लिए भरी जा रही थी। पीछे एक बस और थी, वो भोपाल उज्जैन की आवाज लगा रहे थे। अचानक तेज बारिश होने लगी। आगे वाली बस वाले ने अचानक भरी हुई बस खाली कराना शुरू कर दी। सारे यात्रियों को पीछे वाली बस में भेज दिया गया। इस बस के आगे चौहान लिखा हुआ है। इसका नंबर एमपी 41 जेड ई 9666 था।
बारिश तेज हो गई। इंदौर जाने वाली कोई दूसरी बस नहीं आई। और चौहान वाली बस के कर्मचारियों ने इंदौर के साथ ही उज्जैन वाली सवारियों को भी भर लिया। उससे पूछने पर बताता रहा कि इंदौर वालों को इंदौर ही पहुंचाया जाएगा। लेकिन उसका व्यवहार ठीक नहीं था। रास्ते में कई सवारियों से हुज्जत होती रही। देवास में अचानक बस कंडक्टर ने इंदौर के यात्रियों को उतरने का आदेश दिया। उन्हें दूसरी बस में बारिश के बीच चढ़ाया गया। इसमें किसी भी यात्री को सीट तक नहीं मिली। कई महिलाएं भी थीं। कुछ के टिकट तो पहले वाली बस के कंडक्टर ने ही रख लिए। जिसके कारण दूसरी बस में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश के चलते इस दूृसरी बस का नंबर भी नहीं देख सके। फिर बस कंडक्टर और उसके सहायक की गुंडागर्दी का दौर शुरू हुआ। सारे यात्रियों को भेड़ बकरियों की तरह भरा गया। चालक यात्रियों को आगे की सीट पर भी नहीं बैठने दे रहा था। कुछ यात्रियों से तो गाली-गलौच तक की गई। ये कर्मचारी भोपाल ट्रेवल्स के नाम की धमकियां भी दे रहे थे। बता रहे थे कि उन्हीं की बस है और हमारे लोग देवास-इंदौर सभी स्टैंड पर हैं। हम किसी को भी कहीं भी मार सकते हैं। यह बस चार बजे के आसपास देवास से इंदौर के लिए जाती है। इस बस में दूसरी बस वाले ही नहीं इसमें बैठे यात्रियों से भी बदतमीजी की गई। बस को तीन इमली स्टैंड पर जाने की बात कही गई। एक माल पर कई सवारियां उतारने के बाद आगे चौराहे पर जब थोड़ा जाम लगा, कर्मचारियों ने पिपलियाना, बंगाली चौराहे से लेकर कई जगह उतरने वालों को जबरन वहीं पर उतार दिया। यहां गाडिय़ों की संख्या काफी थी और बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। यात्री उतरे और मजबूरी में उन्हें आटो करके जाना पड़ा।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

Related Articles