MP: हनी ट्रैप में आया पूर्व मुख्य सचिव मोहंती का नाम..
भोपाल। मप्र की राजनीति के सबसे चर्चित कांड हनी ट्रैप में एक बार फिर सुनवाई शुरु हो गई है। इस हाईप्रोफाइल केस में एक जगह ऐसी है, जहां पर एक समय मप्र के प्रशासनिक मुखिया यानि चीफ सेक्रेट्री (cs) रहे IAS एसआर मोहंती का नाम भी आया है।
इधर शनिवार को सुनवाई में चार आरोपित उपस्थित हुए जबकि आरोपित आरती दयाल, ओमप्रकाश और अभिषेक की तरफ से हाजिरी माफी आवेदन प्रस्तुत हुए। न्यायालय ने आवेदन स्वीकार कर लिए। आरोपित श्वेता स्वपनिल जैन न तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुई न उनकी ओर से कोई आवेदन प्रस्तुत हुआ। इस पर कोर्ट ने उसका गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस को 27 जुलाई से पहले उस गिरफ्तार करने को कहा है।
हनी ट्रैप केस पलासिया थाने में सितंबर 2019 में दर्ज होने के बाद सीआईडी भोपाल में मानव तस्करी का भी केस दर्ज हुआ था। पलासिया थाने में आरोपी और उधर सीआईडी केस में फरियादी मोनिका यादव ने अपने बयान में एक जगह पर मोहंती का नाम लिया हैभोपाल जिला कोर्ट में न्यायाधीश भरत कुमार व्यास के सामने हुए बयान में मोनिका यादव ने कहा था कि 15 अगस्त के बाद मेरी पिता से अगली मुलाकाज जब मैं रुचिवर्धन मिश्र (तत्कालीन एसएसपी इंदौर) व शशिकांत चौरसिया (एसटीएफ जांच अधिकारी) के साथ जांच के दौरान गांव गई गई थी तब हुई थी। जांच के दौरान आरएस मोहंती (वास्तव में एसआर यानी सुधी रंजन मोहंती है, बयान में आरएस मोहंती लिखा है) का नाम मुझे सुनने को मिला था। मुझे नहीं पता था कि मोहंती मप्र शासन के मुख्य सचिव थे। मुझे नाम पुलिस के मुंह से सुनने को मिला था। ानकारी नहीं है कि मेरे पिता से लस ने यह बात सरपंच के सामने कही थी।
एसटीएफ ने चालान में अधिकारी के नाम की जगह लिखा एक IAS
इस मामले में एसटीएफ ने चालाकी से कई बड़े लोगों के नाम को छिपा लिया। पुलिस ने यह तो लिखा कि मानव तस्करी केस में कई रसूखदार लोगों ने फार्म हाउस, घर से लेकर कार तक में शारीरिक संबंध बनाए, इसमें मनोज त्रिवेधी, अरुण सहलोद, अण निगम, मनीष अग्रवाल जैसे नाम भी लिखे लेकिन साथ ही एक आईएएस लिखा, उनका नाम कहीं भी नहीं दिया गया है। वहीं पुलिस की इस स्क्रिप्ट से पीडिता पूरी तरह पलट गई और किसी तरह का दबाव होने या संबंध बनाने की बात से टंकार कर दिया। एसआईटी ने पूरी जांच लेकिन साथ ही एक आईएएस लिखा, उनका नाम कहीं भी नहीं दिया गया है। वहीं पुलिस की इस स्क्रिप्ट से पीडिता पूरी तरह पलट गई और किसी तरह का दबाव होने या संबंध बनाने की बात से इंकार कर दिया। एसआईटी ने पूरी जांच में कई नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के नाम आने के बाद भी इन्हें रिकार्ड पर नहीं लिया। करीब 8 आईएएस-आईपीएस और दूसरे बड़े अधिकारियों पर आरोप थे।






