भोपाल। विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को नर्सिंग घोटाले को लेकर हंगामेदार चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीधें तौर पर तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस नर्सिंग घोटाले की जांच के लिए सर्वदलीय कमेटी बनाने की मांग करती रही। शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की आज की कार्यवाही पूरी कराई। विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर आ गए।
सिंघार बोले- सारंग ने सुनियोजित तरीके से सारा खेल किया
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियमों में हेरफेर किए गए। कॉलेजों की संख्या बढ़ती रही। नर्सिंग काउंसिल का इलेक्शन नहीं कराया गया। तत्कालीन मंत्री विश्वास सारंग ने सुनियोजित तरीके से यह सारा खेल किया। तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत वरवड़े ने सरकारी कॉलेज को भी अनसूटेबल बता दिया था।मंत्री के बगैर कोई अधिकारी घोटाला नहीं कर सकता। हाई कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने नर्सिंग स्कूल को नर्सिंग कॉलेज में बदल दिया और वाहवाही लूटने का काम किया। मंत्री का ओएसडी रहा महेंद्र गुप्ता इसमें शामिल है। निजी कंपनी के लोगों को आउटसोर्स पर रखकर मंत्री स्टाफ में शामिल किया गया।
विधानसभा अध्यक्ष से जांच कमेटी बनाने की मांग
भंवर सिंह शेखावत ने कहा- राजस्थान में पढ़ने वाले लोगों ने मध्यप्रदेश में खुद को फैकल्टी के रूप में दर्ज कर लिया, यह कैसे हो गया? इस पूरे मामले में सिर्फ एक जन प्रतिनिधि ही दोषी नहीं है। अफसरों की और कर्मचारियों की लंबी टीम है, जो इसके लिए जिम्मेदार है। विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध है कि सदन के दोनों पक्षों की एक कमेटी बनाएं, जो तय करे कि किसी को बचाना नहीं चाहिए।
14000 फैकल्टी में से 3 हजार फैकल्टी आउट ऑफ स्टेट : जैन
विधायक दिनेश जैन ने कहा कि 14000 फैकल्टी में से 3 हजार फैकल्टी आउट ऑफ स्टेट हैं। सरकार बताए कि आउट ऑफ स्टेट फैकल्टी पर कार्रवाई होगी या नहीं?
जैन ने कहा- विष्णु कुमार सोनकर 15 नर्सिंग कॉलेज के प्रोफेसर, वाइस प्रिंसिपल और प्रोफेसर हैं। उन पर कार्रवाई कब होगी?
तत्कालीन रजिस्ट्रार की कॉल डिटेल की जांच हो : ग्रेवाल
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि जिन लोगों द्वारा कॉलेज संचालित किए जा रहे थे, उनके नाम क्यों छिपाए जा रहे हैं? तत्कालीन रजिस्ट्रार की कॉल डिटेल की जांच की जाए और लाई डिटेक्टर टेस्ट से बयान लिया जाए ताकि घोटालेबाजों की परत खुल सके।
एक ही व्यक्ति 15 कॉलेज का प्रिंसिपल : मंडलोई
विधायक राजन मंडलोई ने कहा- नर्सिंग कॉलेजों में ऐसा भी हुआ है कि एक ही व्यक्ति 15 कॉलेज का प्रिंसिपल रहा है। एक महिला आठ कॉलेज की प्राचार्य रही हैं। सरकार की जानकारी में सब कुछ होता रहा, इसलिए किस पर कार्रवाई की जाएगी, यह बताया जाए।
मधु भगत बोले- नर्सिंग घोटाले में एसीएस सुलेमान भी दोषी
विधायक मधु भगत ने कहा- नर्सिंग घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार था और उस पर क्या कार्रवाई करेंगे? रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी जिन्हें सौंपी गई थी, क्या वे इस पद के पात्र थे? क्या अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान इसके लिए दोषी नहीं हैं?
विक्रांत भूरिया ने पूछा- नर्सिंग कॉलेजों का एरिया घटाकर 11 हजार वर्गफीट क्यों कर दिया गया?
झाबुआ से कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा- 21 फरवरी 2024 के नोटिफिकेशन में नर्सिंग कॉलेजों का 23200 वर्गफीट का एरिया घटाकर 11 हजार वर्गफीट क्यों कर दिया गया? उन्होंने पूछा कि भोपाल के साकेत नगर में बीजेपी पार्षद के भाई दीपक गुप्ता के नाम पर स्कूल और नर्सिंग कॉलेज खोला गया है। ये नियम विरुद्ध हैं, क्या इसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी?
सोलंकी ने कहा- छात्रों के मूल दस्तावेज कॉलेज संचालकों ने अपने पास रखे
विधायक झूमा सोलंकी ने कहा- आर्थिक संकट झेलने वाले नर्सिंग छात्रों को क्या सरकार जनरल प्रमोशन देगी? सभी नर्सिंग छात्रों के मूल दस्तावेज कॉलेज संचालकों ने अपने पास रखे हैं, क्या सरकार उन्हें वापस कराएगी ताकि वे दूसरी डिग्री के लिए प्रयास कर सकें।
सदन में हंगामा, विजयवर्गीय ने स्पीकर से की हस्तक्षेप करने की मांग
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने पर सदन कैसे चलेगा?
इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे। इस पर विजयवर्गीय ने तेज आवाज में कहा- अगर ऐसी स्थिति रही तो सदन नहीं चलेगा। अध्यक्ष जी, आपको हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
सारंग बोले- नियम शिथिल करने का काम कांग्रेस सरकार ने किया
विपक्ष के आरोपों के जवाब में मंत्री सारंग ने कहा- कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पहले 453, बाद में 445 नर्सिंग कॉलेजों को बिना इंस्पेक्शन मान्यता दी गई। कांग्रेस सरकार के समय 453 कॉलेज थे, इनमें से डेढ़ सौ कॉलेज भौतिक सत्यापन में बंद हुए हैं। मलय कॉलेज ऑफ नर्सिंग भी इनमें शामिल है।परमिशन संबंधी जो नियम 2018 में भाजपा सरकार ने बनाए थे, वे कांग्रेस गवर्नमेंट में लागू नहीं किए गए। नियम शिथिल करने का काम कांग्रेस सरकार ने किया। इन्होंने ही अकादमिक भवन की अनिवार्यता को नकारा। उनके समय ऑफलाइन आवेदन किया जाता था। बीजेपी की सरकार ने इसे ऑनलाइन किया। स्क्रूटनी कमेटी में मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर को शामिल किया गया ताकि गड़बड़ी रोकी जा सके।
जांच कमेटी तय करेगी जिम्मेदारी : शुक्ल
चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश पर रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनी है। यह तय करेगी कि घोटाले का जिम्मेदार कौन है, उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। ज्यादा मान्यता देना गुनाह नहीं है, बात यह है कि मान्यता सही होनी चाहिए।
शुक्ल ने कहा कि 6 महीने के अंतराल में छात्रों के एग्जाम कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025 तक एक लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स के एग्जाम करा लिए जाएंगे।
