दिल्ली में दो सत्तापक्ष हो गए हैं। एक केंद्र में बैठी भाजपा और एक राज्य में काबिज आम आदमी पार्टी। लेकिन यहां राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण अधिकारों की लड़ाई लगातार जारी है। लोकसभा चुनाव की परिस्थितियों में परिवर्तन होने के कारण चुनावी मुद्दे भी बदलते जा रहे हैं। तमाम मुद्दे आजमाये जा चुके हैं। अब मतदान के पहले दिल्ली में राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल का मुद्दा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। या ये भी कह सकते हैं कि मुद्दा बनाया जा रहा है।
असल में दिल्ली में चुनाव 25 मई को हैं और यहाँ आप और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, इस कारण इंडिया गठबंधन की स्थिति कुछ बेहतर मानी जा रही है। खैर, पहले आते हैं स्वाति मालीवाल के मुद्दे पर। स्वाति ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के पीए ने उनके साथ मारपीट की। जिस दिन मारपीट हुई उसी दिन वे रिपोर्ट लिखाने थाने भी पहुँचीं, लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखाई। क्यों नहीं लिखाई, इस बारे में कोई उनसे सवाल नहीं कर पा रहा है। इस घटना के बाद केजरीवाल के टूर पर उनके पीए और स्वाति मामले के आरोपी बिभव कुमार उनके साथ नजऱ आ गए। अन्य दलों ने इसकी निंदा की और कहा कि जब दोषी के खिलाफ कार्रवाई ही करनी होती तो उसे साथ लिए क्यों घूमते भला?
इस बीच कुछ लोगों ने कहा कि स्वाति का राज्यसभा टिकट किसी और को दिया जा रहा है इसलिए ये पूरा मामला बनाया जा रहा है। स्वाति ने इन सभी आरोपों का खंडन किया और आखिऱ गुरुवार को मुख्यमंत्री के पीए विभव कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। जब घटना के दिन से ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को उठा लिया तो आप पार्टी समझौते के मूड में आ गई थी। इसीलिए संजय सिंह ने एक सधा हुआ बयान दिया था लेकिन अब इस एफआईआर के बाद मामला आर- पार का हो चुका है। लगता है स्वाति और आप पार्टी में अब किसी समझौते की गुंजाइश नहीं रह गई है।
रिपोर्ट लिखाई जाने और आरोपी की गिरफ्तारी के बीच एक और वीडियो वायरल हुआ, यदि उसे सही माना जाए तो स्वाति मालीवाल के साथ विभव कुमार ने बदलूकी नहीं की, उलटे इसमें तो मालीवाल कहती नजर आ रही हैं कि वे उसकी नौकरी खा जाएंगी। यही नहीं, पीए कह रहे हैं कि वे बाहर चली जाएं। इसमें महिला पुलिस स्वाति को बाहर ले जाते हुए भी दिखाई दे रही है। फिलहाल चूंकि स्वाती महिला हैं और केंद्र में बैठी भाजपा को दिल्ली फतह करने के लिए एक बहुत बेहतरीन मुद्दा मिल गया है, सो भाजपा इस विवाद को खूब हवा दे रही है। इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अब तक यह बात सार्वजनिक नहीं हुई है कि एक महिला सांसद के साथ मुख्यमंत्री के पीए ने इस तरह मारपीट क्यों की?
सवाल तो उठता ही है कि आखिऱ यह पूरा मामला सही मायने में है क्या अैर किससे जुड़ा हुआ है? मालीवाल मामले को जिस तरह से हवा दी जा रही है, यह भी कहा जाने लगा है कि पूरा मामला फ्रेम किया गया है। इस बीच दिल्ली पुलिस सीएम हाउस से वीडियो भी निकाल कर ले गई। दिल्ली पुलिस केंद्र के अधिकृत है। सो आम आदमी पार्टी के लिए और मुश्किल खड़ी हो सकती है। जो वीडियो विभव कुमार को निर्दोष साबित कर सकता है, यदि वह वास्तव में सही है तो उसे पुलिस झुठला भी सकती है। और उसमें छेड़छाड़ की भी पूरी गुंजाइश है। पुलिस चाहे तो झूठे मामले को भी सच बना सकती है, यह कई बार देखा जा चुका है।
राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि आप पार्टी मालीवाल की कथित संदिग्ध गतिविधियों के चलते उनका राज्यसभा का टिकट काटना चाह रही थी। साथ ही यह भी चर्चा है कि उनकी बात भाजपा में भी उच्च स्तर पर चल रही थी। अचानक अपनी ही पार्टी के खिलाफ ऐन चुनाव के पहले जिस तरह से यह मामला उठा है या उठाया जा रहा है, उसके पीछे राजनीतिक साजिश से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।
हालांकि यह सही है कि दिल्ली की चुनावी हवा पक्ष में दिखने के बावजूद फिलहाल तो आप पार्टी ने खुद ही चुनाव के ऐन पहले दूसरी राजनीतिक पार्टियों को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। इंडिया गठबंधन में शामिल दलों को इस मामले में कुछ भी बोलना भारी पड़ सकता है इसलिए वे सिफऱ् यह कह रहे हैं कि महिला का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है और जो भी दोषी होगा, उसके ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री कार्रवाई ज़रूर करेंगे। मामला इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं है, क्योंकि सत्ता में काबिज पार्टी ही इसे सबसे ज्यादा हवा दे रही है। भाजपा का मानना है कि इस मुद्दे के सहारे वह दिल्ली की चुनावी हवा को बदल सकती है। इस तरह का विवाद क्यों हुआ? इसके पीछे आखिर क्या छिपा हुआ है, कोई नहीं जानता। लेकिन विवाद को तूल तो दिया ही जा रहा है। वैसे भी इस चुनाव में जिस तरह के मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वो मुद्दों की श्रेणी में आते ही नहीं हैं। और जो बयान या भाषण दिए जा रहे हैं, वे भी लोकतंत्र की गरिमा के अनुकूल नहीं कहे जा रहे हैं। इस बार प्रतिद्वंद्विता को दो देशों के बीच संघर्ष के रूप में लिया जा रहा है। स्तर की बात तो करना ही बेमानी सा हो गया है।
जय हिंद।
– संजय सक्सेना