नई दिल्ली। देश की प्रमुख जांच एजेंसी ‘केंद्रीय जांच ब्यूरो’ (सीबीआई) के लिए संभवत: अगले सप्ताह नए डायरेक्टर का नाम फाइनल हो सकता है। इस पद की दौड़ में करीब आधा दर्जन आईपीएस अधिकारियों का नाम चल रहा है। मौजूदा सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद को पिछली बार एक साल का सेवा विस्तार प्रदान किया गया था। अब उनका कार्यकाल 25 मई को खत्म हो रहा है। इसके साथ ही आईबी चीफ और सीएपीएफ प्रमुखों में भी अदला-बदली की आहट सुनाई पड़ रही है। इसी महीने यह भी तय हो जाएगा कि केंद्र सरकार में किस आईपीएस को सेवा विस्तार मिलेगा और किसकी विदाई होगी।
केंद्र सरकार ने पिछले साल सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया था। सीबीआई का नया निदेशक कौन होगा, इसके लिए अगले सप्ताह उस हाई पावर कमेटी की बैठक होने जा रही है, जिसमें नए निदेशक के नाम पर मुहर लगेगी। इस कमेटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा शामिल हैं। प्रवीण सूद को 2023 में दो वर्ष के लिए सीबीआई चीफ बनाया गया। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने सूद को सेवा विस्तार देकर उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। साल 2021 में केंद्र सरकार दो अध्यादेशों को मंजूरी देकर सीबीआई और ईडी के निदेशकों के कार्यकाल को दो साल से बढ़ाकर पांच साल करने की अनुमति दी थी। इसके मुताबिक, दो साल का तय कार्यकाल पूरा होने के बाद इन्हें एक-एक वर्ष के लिए तीन सेवा विस्तार दिए जा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल प्रवीण सूद को दूसरा सेवा विस्तार मिलने के आसार बहुत कम नजर आ रहे हैं।
दौड़ में शामिल जीपी सिंह
सीबीआई के नए निदेशक की दौड़ में कई आईपीएस अधिकारियों का नाम सामने आ रहा है। इनमें दो आईपीएस तो ऐसे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के दो पावरफुल मंत्रियों का साथ मिल रहा है। अब देखना ये है कि पीएमओ किसके नाम को हरी झंडी देता है। इनमें पहला नाम सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह का है। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र हैं। सीआरपीएफ में आने से पहले वे असम के डीजीपी रहे हैं। असम में उग्रवाद और उसके बाद सीआरपीएफ में रहते हुए माओवाद को समाप्त करने में उनका खास योगदान रहा है। जीपी सिंह, दो सप्ताह से भी अधिक समय तक पश्चिम बंगाल चुनाव में सड़कों पर उतरे रहे। बंगाल में निष्पक्ष और भय मुक्त मतदान के लिए उन्होंने दिन-रात अपने जवानों के साथ कड़ी मेहनत की है। अब उन्हें इसका इनाम मिल सकता है।
शत्रुजीत कपूर भी पीछे नहीं हैं
1990 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस शत्रुजीत कपूर को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी बताया जाता है। हरियाणा के डीजीपी रहते हुए जब उनका नाम एडीजीपी वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में आया तो मनोहर लाल ही उन्हें वहां से निकाल कर केंद्र में ले आए थे। एफआईआर में कपूर सहित कई आईपीएस का नाम लिखा था। विपक्षी दल और पीड़ित परिवार, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। तब हरियाणा सरकार ने उन्हें कुछ दिन की छुट्टी पर भेज दिया था। मामला ठंडा होते ही उन्हें इस साल जनवरी में आईटीबीपी का डीजी लगा दिया गया। वे इसी वर्ष 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे।
ये तीन नाम भी हैं शामिल
सीबीआई के निदेशक पद की दौड़ में 1993 बैच के केरल कैडर के आईपीएस योगेश गुप्ता का नाम भी चर्चा में है। उन्होंने ईडी और सीबीआई में सराहनीय कार्य किया है। अमित गर्ग, आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। महाराष्ट्र के डीजीपी सदानंद वसंत दाते के नाम पर भी विचार हो सकता है। वे 1990 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। इससे पहले वे राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रमुख रह चुके हैं। एजीएमयूटी कैडर के 1993 बैच के आईपीएस और मौजूदा सीआईएसएफ निदेशक प्रवीर रंजन का नाम भी दौड़ में है।
आईबी निदेशक को मिल सकता है सेवा विस्तार
कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने 21 मई 2025 को 1988 बैच के आईपीएस तपन कुमार डेका के आईबी निदेशक के रूप में कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया था। हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस डेका को 2022 में आईबी प्रमुख नियुक्त किया गया था। उन्हें 2024 में पहला सेवा विस्तार मिला था। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गुड बुक में हैं। ऑपरेशन सिंदूर के अलावा देश में उग्रवाद और नक्सलवाद सहित कई मोर्चों पर उनके काम की प्रशंसा की गई है। ऐसा माना जा रहा है कि उन्हें एक और सेवा विस्तार दिया जा सकता है। अगर सीआरपीएफ में डीजी का पद रिक्त होता है तो एसडीजी वितुल कुमार को महानिदेशक बनाया जा सकता है। वे करीब एक दशक से इसी बल में तैनात हैं। आईजी पर्स के अलावा वे सीआरपीएफ निदेशालय में एडीजी ऑपरेशन्स और बाद में स्पेशल डीजी बनाए गए हैं। अगले माह तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों में भी बदलाव संभव है।
