नायडू-नीतीश के बिना भी NDA के पास पूर्ण बहुमत, मोदी सरकार में बढ़ा शिंदे का रुतबा, अब बेटा बनेगा मंत्री…?

नई दिल्ली। पूर्ण बहुमत के 272 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा था। उस वक्त 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) और 12 सांसदों के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे थे। ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी बार बनी मोदी सरकार की चाबी इन्हीं दोनों नेताओं के हाथ में है और इनके बिना NDA का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, अब 2026 आते-आते सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। पश्चिम बंगाल और फिर महाराष्ट्र में एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने न सिर्फ मोदी सरकार को और मजबूत कर दिया है, बल्कि नायडू और नीतीश पर सरकार की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर दिया है।
महाराष्ट्र: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से उद्धव गुट में बड़ी सेंधमारी
हाल ही में महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत एक बड़ा उलटफेर हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को तगड़ा झटका दिया है। उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर इन सांसदों ने आधिकारिक तौर पर अपना गुट बदल लिया है।
शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसद:
ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव)
नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)
संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी)
संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)
भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)
संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम)
इस बगावत के बाद लोकसभा में उद्धव गुट (UBT) के पास अब मात्र 3 सांसद बचे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है। दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जिसे इन 6 सांसदों ने आसानी से पार कर लिया
बंगाल में तो खेला ही हो गया, NDA में सबसे बड़ी पार्टी बनी NCPI
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। लोकसभा में TMC के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। इस बड़ी बगावत की अगुवाई बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर नेता कर रही हैं। इन सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।
दल-बदल कानून के तहत संसद सदस्यता रद्द होने के खतरे से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक बेहद चालाक रणनीतिक कदम उठाया है। कानूनन दल-बदल से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ आना जरूरी था। इन सभी ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नामक एक बेहद कम चर्चित और गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में अपने गुट का विलय कर लिया है। 2023 के आसपास पंजीकृत हुई यह गुमनाम सी पार्टी रातों-रात भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। 20 सांसदों के विलय के साथ ही यह अब लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और NDA के भीतर दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है।
NDA का मजबूत अंकगणित और कैसे कम हुई निर्भरता?
शिंदे के 6 नए सांसदों और NCPI के 20 सांसदों के NDA में शामिल होने से गठबंधन का कुल आंकड़ा लोकसभा में काफी मजबूत हो गया है। 2024 में सरकार गठन के समय NDA के पास लगभग 293 सांसद थे। अब यह आंकड़ा 318 तक पहुंच गया है।

ऐसे में मौजूदा स्थिति यह है कि अगर आज चंद्रबाबू नायडू (16) और नीतीश कुमार (12) किसी बात पर नाराज होकर NDA से अपना समर्थन वापस भी ले लेते हैं, तब भी नए सांसदों और अन्य छोटे दलों के समर्थन से मोदी सरकार पूर्ण बहुमत (272) के आंकड़े के ऊपर ही रहेगी। यानी सरकार पर से ‘किंगमेकर्स’ का दबाव अब खत्म हो गया है।
NDA में बढ़ा शिंदे का रुतबा
इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अंदर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कद काफी बढ़ा दिया है। 2022 में विधायकों की बगावत के जरिए शिवसेना में दो फाड़ करने के बाद, अब लोकसभा में भी शिंदे ने यह साबित कर दिया है कि ‘असली शिवसेना’ उन्हीं के पास है और उनके पास जमीनी नेताओं का समर्थन है।

मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे को मिलेगा मंत्री पद का इनाम?
उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने वाले इस गुप्त अभियान ‘ऑपरेशन टाइगर’ को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई महीनों से श्रीकांत शिंदे ही इस ऑपरेशन की रणनीति बना रहे थे। बागी सांसदों को दिल्ली लाने के लिए निजी विमान बुक करने से लेकर उनकी सुरक्षा और स्पीकर से मुलाकात तक का पूरा जिम्मा श्रीकांत शिंदे ने ही संभाला था।
अब दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मोदी सरकार में जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार में शिवसेना (शिंदे गुट) को इसका बड़ा इनाम मिल सकता है। NDA के कुनबे में 6 नए सांसद जोड़ने और गठबंधन को मजबूती प्रदान करने के ‘रिटर्न गिफ्ट’ के तौर पर श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिंदे गुट के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत होगी।
बंगाल में TMC का ‘एंडगेम’?
वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है। एक तरफ राज्य विधानसभा में 60 से ज्यादा विधायकों ने अलग गुट बना लिया है और बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली में उनकी पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद छिटक कर उस NDA के पाले में बैठ गए हैं, जिसके खिलाफ ‘दीदी’ ने पिछले एक दशक से सबसे मुखर राजनीति की है।

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