बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री Priyank Kharge ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) को लेकर दिए गए अपने बयान पर दर्ज मानहानि के मामले में कहा है कि उन्हें किसी तरह का डर नहीं है, क्योंकि “संविधान और कानून हमारे साथ हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अदालत के आदेश का सम्मान करेंगे और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेंगे।
बेंगलुरु की एक अदालत ने आरएसएस सदस्य तेजस ए. की निजी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रियांक खड़गे और कर्नाटक यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष Mohammed Haris Nalapad को समन जारी किया है। अदालत ने दोनों को 21 जुलाई 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं ने आरएसएस के खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणियां की थीं।
समन मिलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रियांक खड़गे ने कहा, “हम कानून का पालन करेंगे। अदालत के हर आदेश का सम्मान करना हमारा पहला कर्तव्य है। हमने जो सवाल उठाए थे, वे न तो लापरवाही में पूछे गए थे और न ही गैर-जिम्मेदाराना तरीके से।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस उनकी आवाज दबाने की कोशिश करेगा। खड़गे ने कहा, “यह स्वाभाविक है कि वे हर संभव तरीके से दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन जब संविधान और कानून हमारे साथ हैं, तो डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
RSS के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग पर फिर उठाए सवाल
प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर आरएसएस के पंजीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि संगठन विधिवत पंजीकृत हो जाए तो पूरा विवाद समाप्त हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि दुनिया का इतना बड़ा संगठन अब तक पंजीकृत क्यों नहीं है, उसकी फंडिंग कहां से आती है, खातों का संचालन कौन करता है और वित्तीय पारदर्शिता क्यों नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि Vishwaprasanna Tirtha Swamiji द्वारा भी आरएसएस के पंजीकरण की बात कही गई थी। खड़गे ने कहा कि यदि उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो कम से कम धार्मिक नेताओं की सलाह पर विचार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने किया बचाव
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष B. K. Hariprasad ने प्रियांक खड़गे का समर्थन करते हुए कहा कि यदि आरएसएस कानून का सम्मान करने का दावा करता है, तो उसे पहले अपने संगठन का विधिवत पंजीकरण कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि “दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे।”