Neet को बर्बाद करके रहेंगे प्रदीप जोशी…! mppsc में भी विवादित रहे, भर्ती में हुआ था घोटाला,  बच जाते हैँ बार बार…


नई दिल्ली / भोपाल। नीट यूजी 2026 रद्द हो चुकी है। साथ ही, इसे कराने वाली एनटीए महानिदेशक (डीजी) आईएएस अभिषेक सिंह सफाई दे रहे हैं कि पेपर लीक नहीं हुआ था। बस एक मॉडल पेपर से कई प्रश्न मिलते-जुलते आ गए हैं। इसलिए जीरो टॉलरेंस के तहत यह रद्द की गई है।
साल 2024 में भी (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) नीट पेपर लीक का मुद्दा उठा था। तब मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन सीमित असर बताते हुए पूरी परीक्षा रद्द नहीं की गई थी। इन सब विवादों के बाद भी चेयरमैन प्रोफेसर प्रदीप जोशी चुप हैं। साल 2023 से वह इस पद पर हैं। वहीं, यह उनका पहला विवाद नहीं है। पूर्व आईएएस इक़बाल सिँह बैंस ने उनकी एमपी में एंट्री कराई थी। तमाम घपलों घोटालों के बावजूद जोशी पद पर बने ही नहीं रहते हैँ, बल्कि प्रमोशन पा जाते हैँ।

Psc चेयरमैन के लिए चली थी चिट्ठी
एनटीए प्रमुख प्रदीप जोशी मूल रूप से उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के हैं। उनकी पढ़ाई यूपी के कानपुर में हुई। उनकी पहली बड़ी नियुक्ति मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन पद पर साल 2006 में हुई थी। इस नियुक्ति की नोटशीट तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के सचिव रहे आईएएस इकबाल सिंह बैंस ने चलाई थी।
तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था व सुरक्षा) ए.के. सोनी ने जोशी की नियुक्ति के लिए रिपोर्ट भेजी थी। इसमें साफ लिखा था कि जोशी का संबंध बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से होना ज्ञात हुआ है। इनका चरित्र और छवि अच्छी है। जोशी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष रहे हैं।
Mppsc का सबसे बड़ा प्रोफेसर भर्ती घोटाला
मप्र लोक सेवा आयोग चेयरमैन पद पर उनका कार्यकाल साल 2006 से 2011 तक रहा। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ पीएससी चेयरमैन बने और फिर 2015 से 2020 तक यूपीएससी चेयरमैन रहे। इसके बाद एनटीए में पहुंचे थे।

मध्प्रदेश लोक सेवा आयोग (Mppsc) में उनके कार्यकाल के दौरान साल 2009 में सबसे बड़ा प्रोफेसर भर्ती घोटाला हुआ था। इसमें 350 पदों पर सीधे प्रोफेसर भर्ती हुई। इसमें आज कई बड़े पदों पर बैठे लोग शामिल हैं।जांच रिपोर्ट में भी आया कि नियुक्तियां गलत हुई थीं। साथ ही, चयनित हुए 54 लोगों के पास जरूरी सर्टिफिकेट नहीं थे। निजी सर्टिफिकेट को ही मान्य किया गया, लेकिन इसके बाद भी मामले को दबा दिया गया था।
यूपीएससी चेयरमैन रहते समय यह विवाद
साल 2021 में जब वह यूपीएससी चेयरमैन थे, तब स्पीकर ओम बिरला की बेटी स्वाति का केस उछला था। आरोप लगे कि बेटी को वेटिंग लिस्ट से अंतिम चयन सूची में जगह दी गई है। बाद में सफाई दी गई कि रिक्त पद बढऩे से उन्हें जगह दी गई थी।
नीट यूजी 2024 भी विवादित रहा, डीजी हटे
एनटीए का साल 2024 भी विवादों में रहा। तब भी पेपर लीक का मुद्दा उठा था। वहीं, तब एजेंसी और सरकार ने कहा कि इसका असर केवल कुछ सेंटर तक सीमित रहा, इसलिए उन सेंटरों पर ही दोबारा परीक्षा कराई गई। इसके बाद मामला ठंडा हो गया था।
हालांकि तत्कालीन डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह पर गाज गिरी और उन्हें जून 2024 में पद से हटा दिया गया था। वहीं, जोशी पर कोई असर नहीं पड़ा और वह पद पर बने रहे। अब नीट यूजी 2026 में फिर बड़ा विवाद हो गया और इस बार पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ गई।
करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करती है एनटीए
एनटीए देश की सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी है, जो करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करती है। यह नीट यूजी, नीट पीजी,  जैसी अहम प्रवेश परीक्षाएं कराती है। इसमें हर साल करोड़ों छात्र शामिल होते हैं। देश भर की यूनिवर्सिटीज से लेकर आईआईटी, मेडिकल कॉलेज और लॉ यूनिवर्सिटीज में एडमिशन इसी के जरिए होते हैं।
्रक्चङ्कक्क ने की जांच और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग
उधर NTA के प्रमुख प्रदीप जोशी भले ही छात्र जीवन में एबीवीपी में रहे हैं, लेकिन अब उनके विवादों को देखते हुए एबीवीपी ने निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही कहा है कि सीबीआई जांच के दौरान जो भी साक्ष्य, नेटवर्क एवं दोषी व्यक्ति सामने आएं, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बडिय़ां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं विश्वासघातपूर्ण है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए एनटीए के महानिदेशक को तत्काल अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए।

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