लोगों को सरकार का गुलाम नहीं बनाया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार, पुलिस अधिकारियों को लगाई फटकार..

मुंबई: सरकार के फैसलों का विरोध करना किसी नागरिक को तड़ीपार (एक्सटर्नमेंट) करने का आधार नहीं हो सकता। यह अहम टिप्पणी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति माधव जे. जामदार ने मुंबई पुलिस द्वारा एसडीपीआई के नेता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार आदेश रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीने का अधिकार देते हैं। केवल सरकार के खिलाफ नारे लगाने या उसके निर्णयों का विरोध करने के आधार पर किसी व्यक्ति को शहर से बाहर करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
जस्टिस जामदार की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जामदार ने पुलिस की कार्रवाई पर तीखी मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है? वे विरोध नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते? विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति “बीजेपी सरकार मुर्दाबाद” या “अमित शाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाता है, तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ तड़ीपार जैसी कार्रवाई उचित नहीं ठहराई जा सकती।
पुलिस अधिकारियों को लगाई फटकार
अदालत ने कहा कि पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की नहीं, बल्कि जनता की सेवक है। जस्टिस जामदार ने पुलिस अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाने पर भी विचार किया जाएगा।
किस मामले में हुई थी कार्रवाई?
सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी ने समान नागरिक संहिता (UCC) और ज्ञानवापी मस्जिद जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किए थे। पुलिस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए उन्हें एक वर्ष के लिए तड़ीपार करने का आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने डीसीपी और कोंकण मंडल के डिविजनल कमिश्नर के इस आदेश को रद्द कर दिया।
राजनीतिक माहौल पर भी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि राज्य में “हॉर्स ट्रेडिंग” चल रही है और यदि किसी के खिलाफ एफआईआर हैं तो वह भी “पाला बदलने” पर विचार कर सकता है, क्योंकि “एक वॉशिंग मशीन है।”
कौन हैं जस्टिस माधव जे. जामदार?
पुणे के निवासी हैं।
13 जनवरी 1967 को जन्म हुआ।
मुंबई के कीर्ति कॉलेज से बीएससी और न्यू लॉ कॉलेज, दादर से एलएलबी की।
1991 से बॉम्बे हाईकोर्ट में सिविल, संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों की वकालत की।
वर्ष 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए।
उनके पिता जे. डी. जामदार भी न्यायिक सेवा में रहे और बॉम्बे सिटी सिविल एवं सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
नोट: जस्टिस जामदार की कई तीखी टिप्पणियां सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियां (oral observations) हैं। किसी मामले में कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रभाव मुख्यतः अदालत के लिखित आदेश में दर्ज निष्कर्षों का होता है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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