MP: मानहानि के मामले में मेधा पाटकर को पांच महीने कारावास की सजा, बोलीं- कोर्ट के फैसले को दूंगी चुनौती

नई दिल्ली। अदालत ने सोमवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और कार्यकर्ता मेधा पाटकर को 2001 में विनय कुमार सक्सेना द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि मामले में पांच महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें 10 लाख रुपये बतौर हर्जाना सक्सेना को देने का आदेश दिया है। वीके सक्सेना वर्तमान में दिल्ली के उपराज्यपाल हैं।

कोर्ट ने कहा कि पाटकर की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को देखते हुए उन्हें अधिक सजा नहीं दी जा रही है। जज ने कहा कि सजा 30 दिनों तक स्थगित रहेगी।

सक्सेना ने 25 नवंबर 2000 को देशभक्त का असली चेहरा शीर्षक से एक प्रेस नोट में उन्हें बदनाम करने के लिए पाटकर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। प्रेस नोट में पाटकर ने कहा हवाला लेन-देन से दुखी वी.के.सक्सेना खुद मालेगांव आए, एनबीए की तारीफ की और 40,000 रुपये का चेक दिया। लोक समिति ने भोलेपन से तुरंत रसीद और पत्र भेजा जो ईमानदारी और अच्छे रिकॉर्ड रखने को दर्शाता है। लेकिन चेक भुनाया नहीं जा सका और बाउंस हो गया। जांच करने पर बैंक ने बताया कि खाता मौजूद ही नहीं है।

पाटकर ने कहा कि सक्सेना कायर हैं, देशभक्त नहीं
2001 में शिकायत दर्ज होने के बाद अहमदाबाद की एमएम अदालत ने आईपीसी की धारा 500 के तहत अपराध का संज्ञान लिया और पाटकर के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 204 के तहत प्रक्रिया जारी की। 3 फरवरी, 2003 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी की सीएमएम अदालत ने शिकायत प्राप्त की। 2011 में पाटकर ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का दावा किया।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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