जिमखाना बंद करने के फैसले पर दुखी किरन बेदी ने कहा – जैसे अपने घर से निकाला जा रहा है…

नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी Kiran Bedi ने दिल्ली के प्रतिष्ठित Delhi Gymkhana Club को खाली करने के केंद्र सरकार के फैसले पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बेदखली का आदेश सुना तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ, “जैसे मुझे अपने ही घर से निकाल दिया गया हो।”
बचपन से जुड़ी हैं यादें
किरण बेदी ने बताया कि वह 14 साल की उम्र से अमृतसर से दिल्ली टेनिस टूर्नामेंट खेलने आया करती थीं। उन्हीं दिनों में उनका जुड़ाव जिमखाना क्लब से बना और दिल्ली के प्रति लगाव बढ़ा। बाद में जब उनकी पहली पोस्टिंग दिल्ली में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर हुई, तब यह क्लब उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा भी रहा।

खेल और सामाजिक जीवन का केंद्र
बेदी ने क्लब को भारत की विरासत, आधुनिकता और खेल संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यहां दुनिया भर के खिलाड़ी आते थे और उन्होंने खुद कई दिग्गज खिलाड़ियों को खेलते देखा, जिनमें Ramanathan Krishnan, Vijay Amritraj और Anand Amritraj जैसे नाम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि क्लब के लॉन टेनिस कोर्ट एशिया के बेहतरीन कोर्ट्स में गिने जाते थे और दिल्ली लॉन टेनिस एसोसिएशन कॉम्प्लेक्स बनने से पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले यहीं आयोजित होते थे।
बुजुर्गों और परिवारों के लिए “दूसरा घर”
किरण बेदी के मुताबिक क्लब सिर्फ खेल का केंद्र नहीं था, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और सरकारी परिवारों के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा भी था। यहां का स्विमिंग पूल, लाइब्रेरी, रीडिंग रूम और लॉन लोगों के लिए नियमित मेलजोल और सक्रिय जीवन का माध्यम बने हुए थे।
उन्होंने यह भी बताया कि क्लब में महिलाओं को पहले वोटिंग अधिकार नहीं थे, लेकिन उन्होंने इस भेदभाव को चुनौती दी और बाद में नियम बदले गए।

सरकार के फैसले पर पुनर्विचार की मांग
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने क्लब को बेदखली नोटिस जारी करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा ढांचे की जरूरतों का हवाला दिया है। मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय ने 1928 की लीज डीड के क्लॉज 4 का उल्लेख करते हुए क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। मामला फिलहाल अदालत में लंबित है।
किरण बेदी ने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की यादों और पहचान से जुड़ी जगह है।

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