खुद को सुपर CJI न समझें’:ल,  ₹37,000 करोड़ के घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी प्रशासनिक शाखा की आलोचना की

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने ही प्रशासनिक विंग (रजिस्ट्री) के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए तीखी टिप्पणी की। अदालत ने रजिस्ट्री के अधिकारियों पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि वे खुद को “सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया” समझने लगे हैँ।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमालया बागची की बेंच ने ₹37,000 करोड़ के निवेश धोखाधड़ी मामले में न्यायिक आदेश का पालन न करने पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने इस प्रशासनिक चूक की जांच के लिए अब एक औपचारिक ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ जांच के आदेश दिए हैं।

यह मामला आयुषी मित्तल (उर्फ आयुषी अग्रवाल) की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जो ₹37,000 करोड़ के बड़े निवेश घोटाले में आरोपी है। बेंच ने गौर किया कि 23 मार्च को दिए गए आदेश के बावजूद, रजिस्ट्री ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी नहीं किया था।

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