CBSE ने गलती मानी, लाखों छात्रों की आंसर शीट्स को लेकर बड़ी चूक ढूंढने वालों का ‘आभार’ व्यक्त किया

नई दिल्ली। सीबीएसई ऑन-स्क्रीम सिस्टम के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि 4 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए 11 लाख से अधिक आंसर शीट्स मांगी हैं। यानी 4 लाख से अधिक स्टूडेंट्स को लगता है कि इस बार मार्किंग सिस्टम में कोई गड़बड़ी हुई है। बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दूसरे स्टेज यानी मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई की डेट बढ़ाकर 1 जून कर दी है। इसके अलावा बोर्ड 2027 से रिजल्ट के साथ सभी स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है।

यह मामला सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या आरोप लगाए गए हैं?
12वीं के छात्रों निसर्ग अधिकारी और सार्थक सिद्धांत ने दावा किया कि सीबीएसई के मूल्यांकन से जुड़े क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षा खामी थी।
आरोप है कि AWS बकेट की गलत कॉन्फिगरेशन के कारण आंसरशीट्स, प्रश्नपत्र और अन्य दस्तावेज बिना उचित प्रमाणीकरण (Authentication) के एक्सेस किए जा सकते थे।
निसर्ग अधिकारी ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट साझा कर दावा किया कि लाखों स्कैन की गई कॉपियां डाउनलोड की जा सकती थीं।
सार्थक सिद्धांत ने आंसरशीट्स की स्कैनिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सार्वजनिक हुई कॉपियों में ड्रॉप-शैडो और पन्नों के मोड़ दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य हाई-क्वालिटी स्कैनिंग से मेल नहीं खाते।

सीबीएसई ने क्या स्वीकार किया?
सीबीएसई ने आधिकारिक बयान में माना कि उसके सर्विस प्रोवाइडर के OnMark पोर्टल में कुछ सुरक्षा कमजोरियां (Vulnerabilities) थीं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई है।
बोर्ड के अनुसार:
इन कमजोरियों की निगरानी और जांच की जा रही है।
सरकार के विभिन्न विभागों और IITs के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम सिस्टम को मजबूत बनाने में लगी है।
पहचानी गई खामियों को ठीक कर दिया गया है।
अन्य संभावित कमजोरियों की भी जांच जारी है।
सिस्टम को अधिक सुरक्षित संरचना (Safer Setup) में माइग्रेट किया जा रहा है।

सीबीएसई की प्रतिक्रिया
सीबीएसई ने उन लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने सुरक्षा खामियों की जानकारी दी। बोर्ड ने कहा कि उसने कुछ लोगों से सीधे संपर्क भी किया है और अन्य सुझावों के लिए अपनी सुरक्षा टीम का ईमेल साझा किया है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह:
छात्रों की गोपनीय जानकारी की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाता है।
बड़े पैमाने पर डेटा सुरक्षा और क्लाउड कॉन्फिगरेशन की निगरानी की आवश्यकता को दर्शाता है।
हालांकि, सीबीएसई ने यह नहीं कहा है कि किसी छात्र के डेटा का वास्तविक दुरुपयोग हुआ है। बोर्ड का कहना है कि पहचानी गई सुरक्षा कमजोरियों को दूर करने की कार्रवाई की जा चुकी है और जांच जारी है।

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