UPSC में इंजीनियरिंग छोड़ आर्ट्स विषय चुन रहे उम्मीदवार, वैकल्पिक विषयों की समीक्षा की मांग तेज
नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में पिछले कुछ वर्षों से एक दिलचस्प रुझान सामने आया है। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के बड़ी संख्या में उम्मीदवार मुख्य परीक्षा (Mains) में अपने तकनीकी विषयों के बजाय मानविकी (Arts/Humanities) के वैकल्पिक विषय चुन रहे हैं। इस ट्रेंड के बाद संसद की एक स्थायी समिति के सामने वैकल्पिक विषय (Optional Subject) प्रणाली की समीक्षा की मांग जोर पकड़ने लगी है।
UPSC के आंकड़ों में बड़ा बदलाव
संसदीय स्थायी समिति ‘कार्मिक, जन शिकायत, कानून और न्याय’ के साथ साझा किए गए UPSC के आंकड़ों के अनुसार, इंटरव्यू (Personality Test) तक पहुंचने वाले मानविकी स्नातकों की हिस्सेदारी 2019 में 20.59% थी, जो 2025 में बढ़कर 34.41% हो गई।
इसी तरह अंतिम चयनित उम्मीदवारों में मानविकी पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी 24.19% से बढ़कर 35.28% हो गई।
वहीं, विज्ञान एवं तकनीकी पृष्ठभूमि (इंजीनियरिंग, विज्ञान और मेडिकल) के उम्मीदवारों का अनुपात घटा है। इंटरव्यू तक पहुंचने वालों में यह हिस्सा 79.41% से घटकर 65.59% और अंतिम चयन में 75.81% से घटकर 64.72% रह गया।
इंजीनियर सबसे ज्यादा, लेकिन ऑप्शनल में इंजीनियरिंग सबसे कम
हालांकि 2025 में चयनित उम्मीदवारों में करीब 47% इंजीनियरिंग ग्रेजुएट थे, लेकिन उन्होंने मुख्य परीक्षा में इंजीनियरिंग विषयों को लगभग पूरी तरह छोड़ दिया।
2025 में चुने गए सभी वैकल्पिक विषयों में:
मानविकी विषयों की हिस्सेदारी 84%
विज्ञान विषय 11%
मेडिकल विषय 3%
इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी विषय केवल 2% रहे।
टॉप-50 में सिर्फ एक उम्मीदवार ने चुना इंजीनियरिंग ऑप्शनल
UPSC 2025 के टॉप-50 रैंकधारकों में 16 इंजीनियरिंग ग्रेजुएट शामिल थे। इनमें से केवल एक उम्मीदवार ने इंजीनियरिंग को वैकल्पिक विषय चुना, जबकि बाकी 15 ने ज्यादातर मानविकी विषयों का चयन किया।
यह ट्रेंड नया नहीं है। 2016 में टॉप-50 में 36 इंजीनियरिंग ग्रेजुएट थे, लेकिन उनमें भी केवल पांच ने इंजीनियरिंग ऑप्शनल चुना था। इसके बाद अपने मूल विषय को चुनने वालों की संख्या लगातार घटती गई।
संसदीय समिति ने उठाए सवाल
इस रुझान को देखते हुए विभिन्न दलों के सांसदों, जिनमें कई पूर्व सिविल सेवक भी शामिल हैं, ने UPSC से पूछा कि आखिर इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार अपने ही विषय को ऑप्शनल क्यों नहीं चुन रहे हैं।
समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या मौजूदा वैकल्पिक विषय प्रणाली कुछ खास शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ देती है और क्या इसमें सुधार की आवश्यकता है।
डोमेन विशेषज्ञता बनाम सामान्य प्रशासन
समिति के सदस्यों का मानना है कि सिविल सेवाओं में केवल सामान्य प्रशासनिक क्षमता ही नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता (Domain Expertise) भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में वैकल्पिक विषयों की वर्तमान व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बहस?
UPSC की मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि कुछ विषय अपेक्षाकृत अधिक अंक दिलाने वाले माने जाते हैं, जिससे विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों के बीच समान अवसर का सवाल उठता है। दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि वैकल्पिक विषय उम्मीदवार की गहन विषयगत समझ का आकलन करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
हालिया आंकड़ों ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है और अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या भविष्य में UPSC की परीक्षा प्रणाली में वैकल्पिक विषयों को लेकर कोई बदलाव किया जाता है।