1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल खरीद पर बड़ा बदलाव, कमर्शियल खरीदारों से हटाई गई मात्रा की सीमा…

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल की खरीद से जुड़े एक अहम अस्थायी प्रतिबंध को हटा दिया है। अब बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता (कमर्शियल खरीदार) फिर से खुदरा पेट्रोल पंपों से बिना किसी मात्रा सीमा के पेट्रोल और डीजल खरीद सकेंगे। यह फैसला देशभर में लागू होगा।
यह बदलाव आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की बिक्री के नियमों में नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट कंपनियों, फैक्ट्रियों, उद्योगों और बड़े व्यावसायिक ग्राहकों की खरीद व्यवस्था से जुड़ा है।
क्यों लगाया गया था प्रतिबंध?
जून 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर असर के कारण कच्चे तेल और ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में सरकार ने एहतियातन बड़े कमर्शियल खरीदारों द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदने पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
इसका उद्देश्य था:
आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता बनाए रखना।
जमाखोरी और अत्यधिक खरीदारी पर रोक लगाना।
पूरे देश में ईंधन की समान आपूर्ति सुनिश्चित करना।
डीजल की कीमतों का अंतर भी बना वजह
उस समय औद्योगिक और थोक ग्राहकों को मिलने वाला डीजल खुदरा कीमत की तुलना में काफी महंगा था। कीमतों के इस अंतर के कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां और उद्योग सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगे थे।
इससे सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर डीजल की मांग तेजी से बढ़ी, जबकि निजी कंपनियों के आउटलेट्स पर बिक्री प्रभावित हुई। इसी असंतुलन को रोकने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे।
अब क्या बदलेगा?
सरकार के नए फैसले के बाद:
ट्रांसपोर्ट कंपनियां फिर से रिटेल पंपों से सामान्य रूप से ईंधन खरीद सकेंगी।
फैक्ट्रियां और औद्योगिक इकाइयों पर लगी मात्रा सीमा खत्म हो जाएगी।
लॉजिस्टिक्स और अन्य कमर्शियल उपभोक्ता बिना अतिरिक्त प्रतिबंध के पेट्रोल-डीजल खरीद सकेंगे।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
सामान्य वाहन मालिकों के लिए पेट्रोल और डीजल खरीदने के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वे पहले की तरह ही पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदते रहेंगे। यह फैसला मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए लागू किया गया है।
सरकार का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में सुधार और पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद अब अस्थायी प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं रह गई है। इसलिए 1 जुलाई से इन्हें वापस ले लिया गया है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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