ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की रिपोर्ट: दुनिया के सबसे गर्मी-जोखिम वाले शहरों में 14 भारतीय शहर शामिल, अहमदाबाद दूसरे स्थान पर

नई दिल्ली। विश्व के 205 बड़े शहरों पर किए गए एक वैश्विक अध्ययन में भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया और घाना को अत्यधिक गर्मी के सबसे अधिक जोखिम वाले देशों में शामिल किया गया है। अध्ययन के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 50 सबसे अधिक गर्मी-जोखिम वाले शहरों में भारत के 14 शहर शामिल हैं। इनमें अहमदाबाद वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है, जबकि इराक का अल बसरा पहले स्थान पर है।
यह अध्ययन ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है, जिसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटी में प्रकाशित किया गया है। इसमें दुनिया के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 205 शहरों का विश्लेषण कर यह आकलन किया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी से लोगों पर कितना खतरा मंडरा रहा है।
अध्ययन में पाया गया कि सबसे अधिक जोखिम वाले 95 प्रतिशत से अधिक शहर दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया तथा उप-सहारा अफ्रीका में स्थित हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल अधिक तापमान ही किसी शहर को जोखिमपूर्ण नहीं बनाता, बल्कि वहां की आबादी की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाएं, एयर कंडीशनिंग जैसी शीतलन व्यवस्थाओं की उपलब्धता तथा हरित क्षेत्र जैसे प्राकृतिक सुरक्षा उपाय भी जोखिम का स्तर तय करते हैं।
भारत के शीर्ष 14 शहर
भारत के जिन 14 शहरों को शीर्ष 50 सबसे अधिक जोखिम वाले शहरों में शामिल किया गया है, उनमें अहमदाबाद के अलावा जयपुर, नागपुर, पुणे, मदुरै, चेन्नई, बेंगलुरु, कानपुर और लखनऊ प्रमुख हैं। अध्ययन में जयपुर को प्रमुख पर्यटन स्थल और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र के रूप में विशेष रूप से उल्लेखित किया गया है।
गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों का जोखिम
अध्ययन की मुख्य लेखिका एवं ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की शोधार्थी नेथमी जयारत्ने कारियावासम ने कहा कि अत्यधिक तापमान के साथ यदि किसी शहर में लोगों की संवेदनशीलता अधिक हो और उससे निपटने की क्षमता सीमित हो, तो गर्मी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि एशिया और अफ्रीका के अनेक बड़े शहरों में यही स्थिति देखने को मिलती है, जिससे गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों का जोखिम बढ़ जाता है।
शोध के अनुसार, मूल्यांकन में आयु वर्ग, आर्थिक स्थिति, शीतलन सुविधाओं तक पहुंच, पेड़-पौधों और हरित क्षेत्रों की उपलब्धता जैसे कारकों को भी शामिल किया गया। इन आधारों पर यह निर्धारित किया गया कि कौन-से शहर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल भीषण गर्मी किसी शहर के समग्र जोखिम का सही पैमाना नहीं है। उदाहरण के तौर पर, बैंकॉक (थाईलैंड) और जेद्दा (सऊदी अरब) जैसे शहरों में तापमान का खतरा अधिक है, लेकिन बेहतर बुनियादी ढांचे और प्रभावी शीतलन व्यवस्थाओं के कारण उन्हें अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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