किसकी सरकार है और कौन पहले सत्ता में था, हमें इस बात से मतलब नहीं; गवर्नर केस में SC

नई दिल्ली। विधानसभा से पारित विधेयकों को मंजूर करने पर राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए 90 दिनों की टाइमलाइन तय करने के मामले में राष्ट्रपति के रेफरेंस पर आज भी अदालत में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर संवैधानिक सुनवाई कर रही है और मंगलवार को दिलचस्प तर्क पेश किए गए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपालों की पावर को लेकर हमारा फैसला इस बात से तय नहीं होगा कि सत्ता में कौन सी पार्टी है या पहले किस दल की सरकार थी। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ समेत 5 जजों की बेंच ने कहा, ‘हम अपना फैसला इस आधार पर तय नहीं करेंगे कि किस पार्टी की सरकार है या कौन पहले था।’

दरअसल अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब तमिलनाडु और केरल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच तीखी बहस होने लगी। दोनों यह बताने लगे कि कब-कब किस राज्यपाल ने विधेयकों को रोका था। सिंघवी ने इस डिबेट के दौरान कहा कि मेरे पास तो चार्ट ही है कब-कब तमिलनाडु और केरल के राज्यपालों ने विधेयक रोके थे। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि इन विधेयकों पर पूरा मंथन किया गया था। इसके अलावा यह भी बताया कि कैसे अन्य राज्यों में भी विधेयक रोके गए थे।

तुषार मेहता ने कहा कि यदि आप गलत रास्ते पर ही चलना चाहते हैं तो मुझे इसमें भी कोई परेशानी नहीं है। मैं उस रास्ते पर भी चल सकता हूं, लेकिन इसकी जरूरत नहीं है। यह राष्ट्रपति के रेफरेंस का मामला है। इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मिस्टर मेहता ऐसी धमकियां यहां काम नहीं करेंगी। सिंघवी ने कहा कि मेहता के पास भी ऐसी लिस्ट हो सकती हैं, जिनमें ऐसी ही देरी की गई थी। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि मेरे पास तो 1947 से लेकर अब तक की डिटेल है। उन्होंने कहा कि ऐसी तमाम चीजें मुझे पता हैं, जब-जब संविधान का उल्लंघन किया गया।

इस बहस के बीच चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि 1947 में तो आर्टिकल 200 और 201 नहीं था। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि मेरा मतलब संविधान लागू होने के बाद से अब तक को लेकर था। उन्होंने कहा कि मीलॉर्ड आपने शायद मेरी बात को समझ लिया होगा। मेरा यह कहना था कि संविधान लागू होने के बाद से अब तक कैसे काम हुआ है। इस पर सिंघवी ने कहा कि मैं समझ गया हूं कि आप कैसे धमकी देना चाहते हैं कि कब-कब क्या हुआ है। इस पर भी चीफ जस्टिस गवई ने दखल दिया और कहा कि मैं इस अदालत को राजनीतिक मंच नहीं बनने देना चाहता।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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