RSS : मनमोहन वैद्य और भैयाजी जोशी का नया ठिकाना बनेगा भोपाल… नई कार्ययोजना…!

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सांगठनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नागपुर और दिल्ली के बाद अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, संघ की उपराजधानी (Sub-capital) के रूप में उभरने जा रही है।
संघ ने अपने दो सबसे कद्दावर चेहरों- डॉ. मनमोहन वैद्य और भैयाजी जोशी के लिए भोपाल को नए ठिकाने के रूप में चुना है। इस फैसले के बाद अब मध्यप्रदेश की सत्ता और संगठन, दोनों पर संघ का प्रभाव और भी स्पष्ट रूप से नजर आने लगेगा।
सत्ता के समीकरणों पर दिखेगा असर
सूत्रों के अनुसार, संघ के सह सरकार्यवाह (Joint General Secretary) डॉ. मनमोहन वैद्य का मुख्यालय अब भोपाल हो सकता है। यह एक अहम निर्णय हो सकता है क्योंकि इससे पहले इतने वरिष्ठ पदाधिकारी का केंद्र आमतौर पर नागपुर या दिल्ली ही रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरएसएस के मनमोहन वैद्य की मौजूदगी से मध्य प्रदेश भाजपा और सरकार के कामकाज में संघ की सक्रियता बढ़ेगी। हालांकि, सह सरकार्यवाह जैसे उच्च पद पर रहते हुए उनका अधिकांश समय देशभर के प्रवास में बीतेगा, लेकिन उनकी रणनीतियों का केंद्र अब समिधा (Samidha – RSS HQ Bhopal) ही होगा।
भैयाजी जोशी की पसंद बना भोपाल
हाल ही में बेंगलुरु में संपन्न हुई प्रतिनिधि सभा (Representative Assembly) में बड़ा फेरबदल हुआ है। पिछले 12 सालों से सरकार्यवाह (General Secretary) की जिम्मेदारी संभाल रहे भैयाजी जोशी अब पदमुक्त हो चुके हैं।
उनकी जगह दत्तात्रेय होसबोले को अगले 3 साल के कार्यकाल के लिए नया सरकार्यवाह चुना गया है। जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद भैयाजी जोशी ने स्वयं भोपाल में रहने की इच्छा जताई है। उनके अनुभव और कद को देखते हुए भोपाल का दबदबा संघ की कार्ययोजनाओं में काफी बढ़ जाएगा।
समिधा में तैयारियां तेज
इन दिग्गज पदाधिकारियों के आगमन को देखते हुए भोपाल स्थित संघ मुख्यालय समिधा में जरूरी सुविधाएं और व्यवस्थाएं जुटाई जाने लगी हैं। जबकि एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और पूर्व सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी के दिल्ली में ही रहने की संभावना जताई जा रही है। राजधानी भोपाल की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) और पूरे देश से इसकी बेहतरीन कनेक्टिविटी इसे रणनीतिक रूप से एक आदर्श केंद्र बनाती है।
पूर्व संघ प्रमुख की परंपरा को आगे बढ़ाने की कोशिश
यह पहला मौका नहीं है जब किसी पूर्व संघ प्रमुख या वरिष्ठ पदाधिकारी ने भोपाल को अपना ठिकाना बनाया हो। साल 2009 में जब तत्कालीन संघ प्रमुख के.एस. सुदर्शन ने मोहन भागवत को कमान सौंपी थी, तब उन्होंने भी भोपाल को ही अपना केंद्र चुना था।
उस समय के.एस. सुदर्शन ने स्पष्ट किया था कि दायित्व मुक्त होने के बाद नागपुर में रुकने का कोई औचित्य नहीं है। वे अपनी सुविधानुसार संघ कार्यों पर ध्यान देना चाहते हैं। आज वही परिस्थितियां मनमोहन वैद्य और भैयाजी जोशी को लेकर भी दिखाई दे रही हैं।

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