राम मंदिर विवाद: पूर्व आउटसोर्स कर्मचारी के गंभीर आरोप, जांच के बीच लगाए रिश्वत और सुरक्षा में लापरवाही के दावे
लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच मंदिर के एक पूर्व आउटसोर्स कर्मचारी ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया है।
पूर्व कर्मचारी शिवांक त्रिपाठी, जिन्होंने दावा किया कि वह मंदिर निर्माण के दौरान और 2025 के अंत तक आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे, ने आजतक से बातचीत में कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में कथित तौर पर दो तरीके अपनाए जाते थे। उनके अनुसार या तो किसी पदाधिकारी की सिफारिश जरूरी होती थी या फिर निजी एजेंसी के माध्यम से 20 से 30 हजार रुपये लेकर नौकरी दिलाई जाती थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्मचारियों का मासिक वेतन करीब 9 हजार रुपये था।
चंदे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
शिवांक ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर दान राशि की गिनती होती थी, वहां पर्याप्त निगरानी नहीं थी और ट्रस्ट से जुड़े लोग आसानी से अंदर-बाहर आते-जाते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार लोगों को वहां से पैसे ले जाते देखा, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह अधिकृत प्रक्रिया का हिस्सा था या नहीं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर परिसर के कई सीसीटीवी कैमरे खराब रहते थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती थी।
बाइक चोरी की घटना का किया जिक्र
पूर्व कर्मचारी ने बताया कि उनकी बाइक मंदिर परिसर के बाहर से चोरी हो गई थी। उनका कहना है कि जांच के दौरान पता चला कि उस क्षेत्र का सीसीटीवी कैमरा भी खराब था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मदद मांगी, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
प्रभावशाली लोगों को लेकर भी लगाए आरोप
शिवांक ने दावा किया कि मंदिर परिसर में कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव अधिक था। उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राय और टिन्नू यादव का नाम लेते हुए कहा कि इनकी भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती थी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित व्यक्तियों की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘बड़े नाम सामने आएंगे’ का दावा
पूर्व कर्मचारी ने कहा कि अब तक केवल “छोटी मछलियां” पकड़ी गई हैं और जांच आगे बढ़ने पर बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने भावनात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि “चंपत राय को गरीब ब्राह्मण का श्राप लगेगा।”
जांच जारी, आरोपों की पुष्टि बाकी
राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले की जांच फिलहाल जारी है। जांच एजेंसियां साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। अभी तक किसी भी जांच एजेंसी ने पूर्व कर्मचारी के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही संबंधित ट्रस्ट पदाधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया जारी की गई है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



