MP : सिविल सेवा के नए नियम, 2 से अधिक बच्चे तो नहीं कर सकेंगे सरकारी नौकरी, प्रोबेशन के 6 माह बाद कोई एक्शन नहीं तो ऑटो परमानेंट होंगे

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार राज्य की सिविल सेवा नियमावली में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी नौकरी के लिए दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों पर प्रतिबंध को यथावत रखा गया है। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले वर्ष इसी शर्त को समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था और उसे मुख्यमंत्री स्तर पर सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी थी, लेकिन नए ड्राफ्ट में सरकार ने अपना रुख बदल लिया है।
दो बच्चों की शर्त बरकरार
मसौदे के नियम 5 और 6 के अनुसार, ऐसा कोई भी उम्मीदवार सरकारी सेवा के लिए पात्र नहीं होगा जिसकी दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ हो।
हालांकि, जुड़वां बच्चों के मामलों में विशेष प्रावधान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति की पहले से एक संतान है और अगली डिलीवरी में जुड़वां या उससे अधिक बच्चे जन्म लेते हैं, तो उसे इस आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा।
यह नियम पहली बार वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Digvijaya Singh के नेतृत्व वाली सरकार ने लागू किया था।
प्रोबेशन और स्थायीकरण के नए प्रावधान
नए मसौदे में भर्ती और सेवा संबंधी प्रक्रियाओं को भी स्पष्ट किया गया है। इसके तहत यदि किसी कर्मचारी का प्रोबेशन काल समाप्त होने के बाद छह महीने तक विभाग उसके स्थायीकरण पर कोई निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वतः स्थायी कर्मचारी माना जाएगा।
सीनियरिटी तय करने का नया तरीका
यदि एक ही वर्ष में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति के माध्यम से नियुक्तियां होती हैं, तो सामान्यतः सीनियरिटी का क्रम इस प्रकार होगा—
सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारी
अनुकंपा नियुक्त कर्मचारी
पदोन्नति से आए कर्मचारी
लेकिन यदि तीनों श्रेणियों के नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को जारी होते हैं, तो पदोन्नति प्राप्त कर्मचारी को सबसे वरिष्ठ माना जाएगा। इसके बाद सीधी भर्ती और फिर अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों का स्थान होगा।
हर वर्ष जारी होगी ग्रेडेशन सूची
ड्राफ्ट के अनुसार विभागों को प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी की स्थिति के आधार पर 31 मार्च तक कर्मचारियों की अद्यतन ग्रेडेशन सूची जारी करनी होगी। इससे वरिष्ठता संबंधी विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
इन परिस्थितियों में भी नियुक्ति नहीं मिलेगी
मसौदे में चार अन्य स्थितियां भी निर्धारित की गई हैं जिनमें अभ्यर्थी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाएगा—
एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होना (विशेष परिस्थितियों में छूट संभव)।
शारीरिक या मानसिक रूप से चिकित्सकीय परीक्षण में अयोग्य पाया जाना।
नैतिक अधोपतन या गंभीर चारित्रिक अपराध में दोषसिद्ध होना।
केंद्र, राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय की सेवा से बर्खास्त किया जा चुका होना।
15 जून तक आमंत्रित हैं सुझाव
GAD ने इस मसौदे पर कर्मचारी संगठनों और आम नागरिकों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक व्यक्ति 15 जून तक विभाग की वेबसाइट पर अपनी राय दे सकते हैं। सुझावों के परीक्षण के बाद अंतिम मसौदा राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। सरकार की योजना इसे मंजूरी मिलने पर जुलाई 2026 से लागू करने की है।
इस प्रस्तावित नियमावली का उद्देश्य भर्ती, प्रोबेशन, वरिष्ठता और पात्रता संबंधी प्रावधानों को अधिक स्पष्ट और एकरूप बनाना बताया जा रहा है।





