MP Congress: मध्य प्रदेश में अब कांग्रेसी नहीं कर पाएंगे विद्रोह, आलाकमान करेगा कार्रवाई

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नई नियुक्तियों को लेकर विरोध के सुर तेज हो गए हैं, लेकिन इस सुर को बंद करने के लिए आलाकमान जल्द ही ठोस कदम उठाने जा रहा है. खिलाफत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर घमासान मचा हुआ है. हाल ही में पार्टी ने कई जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है, लेकिन कुछ नेताओं ने इस पर खुलकर नाराज़गी जताई और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर “सेटिंग” के आरोप लगाए हैं. अब इस पूरे मामले में पार्टी सख्ती के मूड में नजर आ रही है.
कांग्रेस प्रदेश संगठन ने इन नाराज़ नेताओं की शिकायतें और गतिविधियों की रिपोर्ट पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को सौंप दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ नेता सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से पार्टी नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. इन नेताओं पर आरोप है कि वे जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और अगले दो दिनों में ऐसे नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. माना जा रहा है कि पार्टी ऐसे किसी भी अनुशासनहीन व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगी, खासतौर पर तब जब विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं. पार्टी का कहना है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी तरह संगठनात्मक प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद की गई है. यदि किसी को कोई आपत्ति है तो उसे पार्टी मंच पर उठाया जाना चाहिए, न कि मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से. पार्टी के अनुसार, सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने वालों की मंशा संगठन को कमजोर करने की है.
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर विवाद हुआ हो. इससे पहले भी जब-जब नियुक्तियां हुई हैं, कुछ नेता असंतोष जाहिर करते रहे हैं. लेकिन इस बार पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अनुशासनहीनता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी खुद इन मामलों की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही प्रदेश नेतृत्व के साथ मिलकर निर्णय लेंगे. यदि किसी नेता पर कार्रवाई होती है तो यह आने वाले समय में पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के लिए एक सख्त संदेश होगा कि पार्टी अनुशासन सबसे पहले है.





