भोपाल। 20 जुलाई से शुरू होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सरकार से जवाब मांगने की तैयारी तेज कर दी है। इस बार कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के विधायकों ने कुल 1,756 प्रश्न विधानसभा सचिवालय में जमा किए हैं। हालांकि यह संख्या पिछले अधिकांश सत्रों की तुलना में कम है।
आंकड़ों के मुताबिक, मोहन यादव सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब विधायकों ने अपेक्षाकृत कम सवाल पूछे हैं। इससे पहले दिसंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में सबसे कम 1,497 प्रश्न लगाए गए थे।
इस बार पूछे गए 1,756 सवालों में 1,091 ऑनलाइन और 665 ऑफलाइन माध्यम से जमा किए गए हैं। माना जा रहा है कि सत्र की अवधि अपेक्षाकृत कम होने के कारण प्रश्नों की संख्या भी सीमित रही।
विधानसभा में सरकार की होगी जवाबदेही
विधानसभा में पूछे जाने वाले प्रश्न सरकार की जवाबदेही तय करने का अहम संसदीय माध्यम होते हैं। इनके जरिए विधायक विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की स्थिति, प्रशासनिक लापरवाही, वित्तीय मामलों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हैं। सत्ता पक्ष के विधायक भी अपने क्षेत्रों से जुड़े मामलों को प्रश्नों के माध्यम से उठाते हैं, जबकि विपक्ष इन्हीं सवालों के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति बनाता है।
मानसून सत्र की तैयारियां तेज
सत्र की तैयारियों के बीच मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को विधानसभा पहुंचकर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली बैठक में मानसून सत्र की व्यवस्थाओं, प्रशासनिक तैयारियों और समन्वय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है। विधायकों द्वारा लगाए गए प्रश्नों के आधार पर विभिन्न विभागों के मंत्रियों को सदन में जवाब देना होगा।
MP विधानसभा मानसून सत्र: 1,756 सवालों के जरिए सरकार को घेरने की तैयारी, मुख्य सचिव ने की तैयारियों की समीक्षा
