Farji IAS का यूपी-बिहार से गोवा तक नेटवर्क:लखनऊ में 60 हजार किराये का फ्लैट, सीएम- राज्यपाल के साथ फोटो

लखनऊ। फर्जी IAS सौरभ त्रिपाठी का नेटवर्क यूपी-बिहार से लेकर गोवा तक फैला था। बिहार से उसने करीब 4 साल पहले अपना नेटवर्क बनाना शुरू किया। दिल्ली और गोवा में उसे और मजबूत किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को अपना ठिकाना बनाया।

सौरभ की पोल कहीं खुल न जाए इसलिए उसने सबसे पहले आधा दर्जन से अधिक IAS अफसरों से नजदीकियां बढ़ाईं। जुगाड़ और फर्जीवाड़ा करके सरकारी मीटिंग्स और सेमिनारों में IAS बनकर पहुंचने लगा। उसने फूलप्रूफ प्लान के तहत, अपनी ईमेल आईडी GOV.COM, NIC से बनाई। कई राज्यों के सीएम और राज्यपालों से मिलता, उनके साथ फोटो खिंचवाता।

रौब झाड़ने के लिए गनर और नीली बत्ती लगी गाड़ियों की काफिला लेकर चलने लगा। करीब 8 दिन पहले उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए एक बिजनेसमैन ने उससे संपर्क किया, शक होने पर उसने एक सीनियर IAS अफसर को उसके बारे में बताया।
फर्जी IAS सौरभ त्रिपाठी को लेकर भास्कर रिपोर्टर ने पुलिस अफसरों से बातचीत तो चौकाने वाली बातें सामने आई।

बिहार से शुरू किया फर्जीवाड़े का खेल
पुलिस के अनुसार, सौरभ त्रिपाठी मूलरूप से मऊ के इमलिया मऊ का रहने वाला है। मऊ बिहार के पास है। बिहार से बड़ी संख्या IAS अफसर निकले हैं। इस वजह से उसने फर्जी IAS अफसर बनने की कहानी बिहार से शुरू की। पुलिस की जांच में सामने आया कि उसने करीब 4 साल पहले बिहार में तैनात आधा दर्जन IAS अफसरों से नजदीकियां बढ़ाईं।
फिर, उनके जरिए सरकारी मीटिंग्स और सेमिनारों में पहुंचकर IAS जैसी पहचान बनाने का उसका खेल शुरू हुआ। धीरे-धीरे उसने बिहार के प्रशासनिक तंत्र में संपर्क बना लिए और उसी आधार पर दिल्ली तक नेटवर्क फैलाया।
यूपी-गोवा-दिल्ली तक VIP एक्सेस, IAS की तरह चीफ गेस्ट बना

पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, सौरभ त्रिपाठी यूपी के कई जिलों के सरकारी कार्यक्रमों में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हो चुका है। मंच पर IAS की तरह बैठता था। भाषण देता था। आयोजकों को बताता था कि वह दिल्ली में पोस्टेड है। जल्द ही यूपी कैडर में वापस आने वाला है।
इतना ही नहीं, उसने गोवा के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के साथ तस्वीरें खिंचवा लीं। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों को झांसे में लिया। इस तरह से उसने बिहार, दिल्ली, गोवा और उत्तर प्रदेश में अपना ठिकाना बना लिया।

विश्वास जमाने के लिए फर्जी NIC मेल आईडी का प्रयोग करता था
IAS अधिकारी होने का भरोसा दिलाने के लिए सौरभ ने फर्जी NIC और GOV मेल आईडी बनाई। अपने PS के नाम से भी ईमेल आईडी तैयार कराई। इन्हीं मेल आईडी से मंत्रालयों और विभागों में पत्राचार करता था। खुद को कैबिनेट स्पेशल सेक्रेटरी बताता था।
जांच में सामने आया कि सौरभ लखनऊ के शालीमार वन वर्ल्ड अपार्टमेंट में रह रहा था। इस फ्लैट का किराया 60 हजार रुपए महीना है। उसने दो गनर तक की सुविधा ले रखी थी, ताकि लोग उसे वीवीआईपी समझते रहें। उसकी पत्नी B.Tech है और एक कंपनी में नौकरी करती है। दो बच्चों के साथ पूरा परिवार इसी फ्लैट में रहता था।

NGO के जरिए बैठकों में एंट्री करता था
पुलिस ने पता लगाया कि सौरभ एक NGO से जुड़ा हुआ था। इसी NGO के सहारे वह अलग-अलग राज्यों में होने वाली बैठकों और सरकारी आयोजनों में पहुंचता था। इन मीटिंग्स में उसने कई IAS और राजनेताओं के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। इन्हीं तस्वीरों को सोशल मीडिया पर डालकर अपने नेटवर्क को और मजबूत करता रहा।

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