महर्षि विश्व विद्यालय की डिग्रियों की होगी जांच, बालाघाट SP ने कटनी कलेक्टर को पत्र लिखा, यूजीसी नियमों का उल्लंघन…?

कटनी। महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय की डिग्रियों को लेकर नया विवाद सामने आया है। बालाघाट पुलिस अधीक्षक (SP) ने कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कटनी कलेक्टर को पत्र भेजा है। मामले में विश्वविद्यालय से जुड़े परीक्षा केंद्रों और अध्ययन केंद्रों की जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस को कुछ अभ्यर्थियों की डिग्रियों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर शिकायतें मिली थीं। आरोप है कि कई परीक्षा केंद्रों पर नियमों के विपरीत तरीके से परीक्षाएं संचालित की गईं और दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका है। इसके बाद बालाघाट SP ने प्रशासनिक जांच की सिफारिश की।

कटनी प्रशासन अब संबंधित परीक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर, परीक्षा आयोजन और डिग्री जारी करने की प्रक्रिया की पड़ताल कर रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं फर्जी तरीके से परीक्षाएं कराकर डिग्रियां तो जारी नहीं की गईं।

University Grants Commission के नियमों और कथित अवैध परीक्षा केंद्रों को लेकर घिरे महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय प्रबंधन पर अब कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ता छात्र आशीष धुर्वे द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर जांच शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय की मान्यता, संचालन व्यवस्था और डिग्रियों की वैधता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
मामले में कार्रवाई की शुरुआत Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh के उस महत्वपूर्ण फैसले के आधार पर हुई है, जिसमें संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर प्रारंभिक जांच और FIR दर्ज करने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय के परिपत्रों के हवाले से भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

विश्वविद्यालय चार बड़े आरोपों में घिरा
1. निजी या शासकीय विश्वविद्यालय?
विश्वविद्यालय की कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय से भ्रम बना हुआ है। यूजीसी के 7 नवंबर 2014 के पत्र के अनुसार, इसे स्ववित्त पोषित “राज्य निजी विश्वविद्यालय” की श्रेणी में माना गया था। आरोप है कि विश्वविद्यालय अपने गठन से संबंधित मूल गजट अधिसूचनाएं और सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करता, जिससे छात्रों को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिल पाती।
2. यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप
University Grants Commission के निजी विश्वविद्यालयों के लिए निर्धारित नियमों—विशेषकर क्षेत्राधिकार और संचालन संबंधी प्रावधानों—के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। यदि जांच में यह सही पाया जाता है, तो विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिग्रियों की वैधता पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
3. परीक्षा केंद्रों में अनियमितता
शिकायतकर्ता छात्र की अंकसूची में परीक्षा केंद्र का उल्लेख नहीं होने को बड़ा सबूत माना जा रहा है। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने कटनी मुख्यालय के बाहर बालाघाट समेत कई जिलों में नियमों के विपरीत परीक्षा केंद्र संचालित किए। यह यूजीसी के टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
4. धोखाधड़ी का मामला बनने की आशंका
कानून विशेषज्ञों के अनुसार यदि छात्रों को विश्वविद्यालय की मान्यता, परीक्षा प्रक्रिया या डिग्री की वैधता के बारे में गलत जानकारी देकर प्रवेश दिलाया गया, तो भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी संबंधी धाराएं लागू हो सकती हैं। इसमें आर्थिक शोषण और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग जैसे पहलुओं की भी जांच संभव है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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