Cough syrup रैकेट: आलोक-शुभम की कोठियों और लग्जरी सामानों का मूल्यांकन करने वाले भागे

लखनऊ. कफ सिरप के अवैध कारोबार में लिप्त बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की लखनऊ स्थित कोठी और वाराणसी में शुभम जायसवाल के बंगले में पूरी रात प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई चली। आलोक की कोठी में कई जमीनों के दस्तावेज मिले हैं। आलोक और शुभम के घरों पर केवल ‘इंटीरियर वर्क’ ही करोड़ों में पाए गए हैं। लखनऊ में पूरी कार्रवाई के दौरान तीन-तीन मूल्यांकन करने वाले बुलाए गए, लेकिन वह वहां का माहौल देखकर दहशत में आ गए। तीनों यह कहकर बिना मूल्यांकन किए ही चले गए कि उन्हें बाद में ये दबंग लोग परेशान करेंगे। किसी तरह वहां लाए गए चौथे मूल्यांकनकर्ता ने कोठी, वहां रखे साज-सज्जा के लग्जरी सामान और अन्य वस्तुओं का मूल्यांकन शुरू किया। वहीं, वाराणसी में शुभम जायसवाल के घर का मूल्यांकन करने वाले ने भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद लखनऊ से मूल्यांकन के लिए दो लोगों को भेजा गया है।

ईडी के अफसरों ने यह जरूर कहा कि कफ सिरप के अवैध कारोबार से कमाई गई रकम इस कोठी के निर्माण में भी लगाई गई है। ईडी सूत्रों के मुताबिक घर वालों से आलोक की फर्मों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। उनसे यह पूछा गया कि कोठी में लगी रकम आलोक कहां से लाया। इस बारे में घर की महिलाओं ने कोई भी जानकारी होने से इनकार किया। ईडी के मुताबिक इस बारे में जेल के अंदर आलोक सिंह से पूछताछ की जाएगी। इस समय आलोक एसटीएफ की रिमांड पर है, जो रविवार सुबह खत्म हो रही है।

पूर्व सांसद का करीबी होने से दहशत
ईडी सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब छापे के बाद आलोक की कोठी की नापजोख शुरू की गई, तभी मूल्याकंन करने आए लोग दहशत में रहे। पूर्व सांसद का करीबी होने की वजह से आलोक के घर का मूल्यांकन करने वालों ने मना कर दिया कि वह यहां का मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे। अफसरों ने उन्हें काफी आश्वस्त किया, लेकिन वे यही कहते रहे कि ये लोग बाद में परेशान करेंगे। सूत्रों के मुताबिक करीब दो घंटे एक और मूल्यांकनकर्ता को बुलाया गया। उसने इंटीरियर वर्क के साथ कोठी में रखे हर साज सज्जा सामान का मूल्यांकन शुरू किया।

वाराणसी में भी शुभम की दहशत दिखी
वाराणसी में शुभम के घर मिले लग्जरी बैग, घड़ियों की कीमत तो डेढ़ से दो करोड़ रुपये आंकी गई थी। रात में तो मूल्यांकन होता रहा पर सुबह होते ही इस मूल्यांकनकर्ता ने भी आगे की कार्रवाई से मना कर दिया। उसे भी समझाया गया, लेकिन उसने आगे मूल्यांकन करने में असमर्थता जता दी। इसके बाद लखनऊ से मूल्यांकन करने के लिए दो लोग वाराणसी में शुभम जायसवाल के घर भेजे गए।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

Related Articles