Vedanta के अनिल अग्रवाल ने डिमर्जर के बाद शेयरधारकों को लिखा खत, 5 हिस्सों में बांटी कंपनियों पर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने शेयरधारकों को एक उत्साहवर्धक खत लिखा है। 1 मई 2026 से प्रभावी हुए ऐतिहासिक डीमर्जर (Demerger) के बाद, वेदांता के अलग-अलग व्यवसाय अब स्वतंत्र कंपनियों के रूप में काम करेंगे। अपने पत्र में अग्रवाल ने वित्त वर्ष 2026 के रिकॉर्ड मुनाफे की जानकारी दी और अलग हुई 5 प्रमुख कंपनियों के भविष्य के रोडमैप का खुलासा किया।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन कैसा रहा?
वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने टैक्स के बाद ₹25,096 करोड़ का अब तक का सबसे अधिक प्रॉफिट कमाया। इस दौरान कंपनी की कुल आय ₹1,74,075 करोड़ रही। शेयरधारकों को लगभग 50% का शानदार रिटर्न मिला, जो सेक्टर के औसत से काफी ज्यादा है। इसके अलावा प्रति शेयर ₹334 का डिविडेंड भी दिया गया। कंपनी की कर्ज स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है। भविष्य की ग्रोथ के लिए ₹15,000 करोड़ का ग्रोथ कैपेक्स लगाया गया है।
1 मई 2026 से लागू हुए डीमर्जर का क्या मतलब है?
अनिल अग्रवाल ने बताया कि इस डीमर्जर से वेदांता के विभिन्न बिज़नेस अब अपनी-अपनी स्वतंत्र कंपनियां बन जाएंगे। हर कंपनी अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों पर काम करेगी और प्रत्येक कारोबार अपने आप में एक अलग ‘वेदांता’ के रूप में उभरेगा।
वेदांता एल्युमिनियम और ऑयल एंड गैस का क्या है फ्यूचर प्लान?
वेदांता एल्युमिनियम
यूरोप, एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में यह सबसे बड़ा उत्पादक बने रहने की स्थिति में है। इसका मुख्य लक्ष्य उत्पादन क्षमता को दोगुना कर 60 लाख टन प्रति वर्ष करना है।
वेदांता ऑयल एंड गैस
कंपनी का लक्ष्य पेट्रोलियम उत्पादन को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख बैरल प्रतिदिन करना है। पिछले 10 सालों में $14.5 बिलियन का निवेश किया गया है और नए रिजर्व्स के साथ नेचुरल गैस पोर्टफोलियो को और मजबूत किया गया है।
पावर और आयरन एंड स्टील सेक्टर में क्षमता कितनी बढ़ेगी?
वेदांता पावर वर्तमान में 4.2 GW की ऑपरेशनल कैपेसिटी है, जिसे 12 GW तक ले जाने का काम पाइपलाइन में है। कंपनी क्लीन एनर्जी के तहत रिन्यूएबल और परमाणु ऊर्जा पर फोकस कर रही है ताकि देश की टॉप 3 पावर कंपनियों में जगह बना सके।
वेदांता आयरन एंड स्टील एक ‘ग्रीन एंड सस्टेनेबल’ स्टील कंपनी के रूप में विकसित हो रही है। गोवा और कर्नाटक में इस्पात उत्पादन क्षमता को 40 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन प्रति वर्ष किया जाएगा। लौह अयस्क की क्षमता भी 150 लाख टन तक बढ़ाई जाएगी।
वेदांता लिमिटेड और हिंदुस्तान जिंक की क्या भूमिका होगी?
ग्रुप की मुख्य कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) के पास हिंदुस्तान जिंक में करीब 60% हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। कंपनी क्रिटिकल मिनरल्स, कॉपर और निकल पर फोकस कर रही है, जो भारत के भविष्य के लिए बेहद जरूरी हैं। वेदांता लिमिटेड वर्तमान में भारत की एकमात्र निकल उत्पादक है।
भविष्य और तकनीकी विकास के लिए क्या है मैनेजमेंट की रणनीति?
लागत को कम रखने और आमदनी बढ़ाने के लिए हर स्तर पर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी अपनी महिला लीडर्स और कर्मचारियों की मेहनत की सराहना करते हुए पर्यावरण, सुरक्षा और समाज के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। खत के अंत में अनिल अग्रवाल ने कंपनी के विजन को स्पष्ट करते हुए लिखा, “हम आगे बढ़ेंगे, तभी भारत आगे बढ़ेगा। जय हिंद!”





