वेदांता कंपनी का कहना है कि प्रवर्तन एजेंसियों की तलाशी के बाद कोई जुर्माना नहीं लगाया गया

नई दिल्ली। देश की दिग्गज माइनिंग और मेटल कंपनी वेदांता (Vedanta) ने अपने खिलाफ हुई ईडी की कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ कर दी है. कंपनी ने कहा है कि 1 जून से 3 जून तक चला सर्च ऑपरेशन अब समाप्त हो चुका है और जांच एजेंसी ने कंपनी पर किसी तरह का कोई जुर्माना नहीं लगाया है. साथ ही कंपनी के बिजनेस ऑपरेशंस या कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है.
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब वेदांता अपने इतिहास के सबसे बड़े कॉर्पोरेट पुनर्गठन यानी डीमर्जर प्लान को आगे बढ़ा रही है. ईडी की कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई थी और शेयर में भी दबाव देखने को मिला था. हालांकि अब कंपनी के स्पष्टीकरण के बाद स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है.
प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा (FEMA) के तहत की गई थी. जांच का मुख्य फोकस वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी ब्रिटेन स्थित मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) को किए गए कुछ भुगतान थे. जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ब्रांड फीस और रॉयल्टी के तौर पर किए गए भुगतान सभी नियामकीय नियमों के अनुरूप थे या नहीं. इसी सिलसिले में दिल्ली, मुंबई और उदयपुर समेत कई स्थानों पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई.
कंपनी ने क्या कहा?
वेदांता के प्रवक्ता ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है. एजेंसी द्वारा मांगी गई सभी जानकारियां और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं. कंपनी ने यह भी कहा कि वह सभी लागू कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पूरी तरह पालन करती है. चूंकि मामला अभी नियामकीय प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए इस स्तर पर इससे ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी राहत
बाजार में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कहीं ईडी की कार्रवाई का असर वेदांता के डीमर्जर प्लान पर न पड़ जाए. कंपनी ने साफ कर दिया है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है और डीमर्जर प्रक्रिया पहले की तरह आगे बढ़ रही है. वेदांता अपने कारोबार को पांच अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में बांटने की तैयारी कर रही है. इस योजना के तहत एल्युमिनियम, ऑयल एंड गैस, पावर, स्टील और बेस मेटल्स कारोबार को अलग-अलग संस्थाओं के रूप में विकसित किया जाएगा. कंपनी को इस प्रक्रिया के लिए पहले ही कई जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं.





