Social Media : हेमा मालिनी और संघ के नशे में डूबा मथुरा…

यमुना भयानक गंदगी से भरी थी।गंदगी से भरी यमुना को देखकर किसी को ग़ुस्सा नहीं आता। भक्त गण, यमुना प्रेमी लोग प्रतिवाद नहीं करते। बल्कि गंदगी में यमुना को रखकर जश्न मनाते हैं। इवेंट करते हैं।गंदगी से भरी नदी में धार्मिक इवेंट देखने हो तो आप कभी भी यमुना किनारे विश्राम घाट-सतीघाट आदि प्रमुख घाटों पर आएँ और गंदगी में धार्मिक इवेंट का आनंद लें!यमुना नदी की पवित्रता का समूचा हिंदू ठाट बेनक़ाब संघियों ने किया है।

सात साल में एकबार यमुना छठ पर घाट किनारे भाजपा के अनेक नेताओं के साथ लोकसभा सांसद हेमा मालिनी भी  आई हैं।उनको गंदगी से भरी यमुना देखकर शर्म नहीं आई।सन् 2014 में पीएम मोदी ने कहा था हेमा मालिनी को जिता दो मैं 15 दिन में यमुना स्वच्छ करा दूँगा। ग्यारह साल हो गए।बेशर्मी ,लूट और निकम्मेपन में डूबे भाजपा नेता ,हेमा मालिनी,योगी-मोदी ,संघ का पूरा परिवार मिलकर भी यमुना साफ़ नहीं करा पाया।मीडिया के अनुसार उन्होंने यमुना स्वच्छ करने के नाम पर काग़ज़ में 1697 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।इनमें से अकेले मथुरा में 235 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।लेकिन नतीजा ज़ीरो है।ये सब पैसा राम नाम की लूट का हिस्सा है!
           हकीकत यह है मथुरा ने जब से भाजपा सांसद को चुना है तब से यमुना में प्रदूषण बढ़ा है।यमुना जल विषाक्त हुआ है।क्योंकि भाजपा-आरएसएस ने जहां पर भी सांगठनिक विस्तार किया है वहाँ उसने प्रदूषण पैदा किया है।प्राकृतिक परिवेश,पर्यावरण,पहाड़,जंगल और नदी,हेरीटेज ,धर्म आदि को नष्ट किया है।इसका प्रधान कारण है संघ-भाजपा की कारखानेदारों – भवन निर्माताओं -कमीशनखोरों-स्थानीय माफ़िया गिरोहों -के साथ साँठगाँठ और स्थानीय जनता की निष्क्रियता।
         प्रदूषण के ख़िलाफ़ संघ-भाजपा ने कभी कोई स्टैंड नहीं लिया।इसके विपरीत उसने पर्यावरण को बचाने वालों के ख़िलाफ़ माफिया-कारपोरेट घरानों और ड्रग माफिया की खुलकर मदद की है।उत्तराखंड से लेकर उड़ीसा तक मथुरा से लेकर काशी तक यह फिनोमिना देखा जा सकता है।
                 मथुरा में  बेशर्मी और सैलीब्रिटी हेकड़ी का आलम यह है कि हेमा मालिनी ने विगत ग्यारह साल में मथुरा की जनता को कभी समय नहीं दिया।टिककर कभी मथुरा में  नहीं रहीं।मंदिरों का राजनीतिक प्रचार के लिए दुरुपयोग किया।वे मुंबई रहती हैं,फिल्में करती हैं,विज्ञापन करती हैं, अपने कार्यक्रम करती हैं।संसद में दस सालों में उनकी न्यूनतम शिरकत रही है।साल में कभी एक आध बार संसद में बोलती हैं।
  शहर में असंख्य समस्याएँ हैं।जनता भटकती रहती है और दलालों -कमीशनखोरों से काम कराती रहती है। 
   

जब मेले आते हैं तो डीजे-नाच-गान आदि के शोर में जनता को इस कदर डुबो दिया  जाता है कि वह यमुना की गंदगी ,बंदरों के आतंक, बेरोजगारी,अकादमिक अव्यवस्था आदि पर सोचने की किसी के पास फ़ुर्सत नहीं होती ।
          मथुरा शहर के अधिकांश शिक्षितों  को संघी ग़ुलामी में मज़ा आने लगा है। उनका संघी प्रेम अफ़ीम के नशेड़ी के अफ़ीम प्रेम से काफ़ी हद तक मिलता-जुलता है. अफ़ीम का जब चस्का लग जाता है तो आसानी से छूटता नहीं है।शहर में अब एंटी- ड्रग एडिक्शन सेंटर का काम करने वाली संस्थाएँ तक़रीबन ठंडी पड़ी  हैं।उनके कर्ताधर्ता सत्ता के क़रीब रहने में मज़े लेने लगे हैं।अथवा सोचते हैं कि हम जनता को जगाकर क्या करेंगे !  हालत इस कदर ख़राब हैं कि जो लोग कुछ साल पहले तक अपने को ‘प्रगतिशील’ कहते थे वे आज गर्व से संघ ,हेमा मालिनी, मोदी , अमित शाह के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।हेमा मालिनी और संघ को चंदा दे रहे हैं।घर में बैठकर राम नाम जप रहे हैं।शहर की सभी प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं पर संघियों ने कब्जा जमा लिया है। 
             फ़िल्मी नामी चेहरे को मथुरा से तीसरी बार मथुरा से जिताकर भाजपा-संघ ने साफ़ संदेश दे दिया है कि मथुरा की लाखों की आबादी में उनके पास कोई भरोसे का साखदार नेता नहीं है, जिसे संसद के लिए प्रत्याशी बना सके।
            हेमा मालिनी का मथुरा से कोई संबंध नहीं।वह आम जनता से मिलना-जुलना, आम जनता में रहना,अपना काम नहीं समझती।यह बीमारी प्रत्येक सैलीब्रिटी में है।सैलीब्रिटी को सांसद बनाएँगे तो वह कभी आपके इलाक़े में टिककर रहेगा नहीं।सैलीब्रिटी का मन संसद और जनता में नहीं लगता।उसका मन धन कमाने में लगता है।संसद में जाना उसके लिए समय बर्बाद करना है।जनता की सेवा करने का उसके पास समय नहीं है।वह तो विज्ञापन, मीडिया और इवेंट के लिए बना है।
            नरेन्द्र मोदी-आरएसएस ने हेमा मालिनी को मथुरा से जिताकर यहाँ की जनता को दंडित किया है।जनता से मेनीपुलेशन और पैसे के बल पर वोट लेना, घूस देकर,झूठे वायदे करके वोट लेना भाजपा की बुनियादी प्रवृत्ति है।हेमा मालिनी उसी पैकेज की देन है।
       मथुरा की जनता का किस तरह उत्पीडन किया गया उसका एक ही नमूना काफ़ी है। यमुना छठ के दिन विश्रामघाट-सती घाट आदि घाटों पर यमुना छठ का मेला लगता है।लेकिन पिछले साल अचानक रात को तक़रीबन एक घंटे बिजली ग़ायब रही।लाखों लोग उससे परेशान हुए।इतने विशाल मेले के समय बिजली का ग़ायब रहना साधारण घटना नहीं है।यदि योगी -मोदी आए होते तो बिजली एक मिनट के लिए नहीं जाती।लेकिन कल बिजली तक़रीबन एक घंटा ग़ायब रही।अव्यवस्था का आलम यह था कि विश्राम घाट और उसके आसपास के बाज़ार और क्षेत्र में भयानक अव्यवस्था थी, जनता परेशान रही।कोई सुव्यवस्था नज़र नहीं आई।
हेमा मालिनी के जनविरोधी स्वभाव को इससे भी समझ सकते हैं कि विगत ग्यारह साल में मथुरा में बेरोज़गारी और अपराध बढ़े हैं।फुटकर व्यापारी ,छोटे दुकानदार आदि के व्यापार में तबाही मची हुई है।मंदिरों की आमदनी में बड़ी मात्रा में गिरावट आई है।देह- व्यापार बढ़ा है।आए दिन सरेआम अपराध हो रहे हैं।

जगदीश्वर चतुर्वेदी की वाल से साभार..

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